Bihar Monsoon Update: बिहार के लोगों को भीषण गर्मी और लू से जल्द राहत मिल सकती है. मौसम विभाग के अनुसार राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून 15 जून के आसपास पहुंचने की संभावना है. मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस बार बिहार में सामान्य से कम बारिश हो सकती है, जिसका असर खेती और किसानों पर पड़ सकता है.
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून 4 जून को केरल के तट पर पहुंच सकता है. यह अपने सामान्य समय से करीब चार दिन देरी से आ रहा है. केरल पहुंचने के बाद मानसून तमिलनाडु और बंगाल की खाड़ी की ओर आगे बढ़ेगा. इसके बाद इसकी गति और दिशा का आकलन कर 8 जून के बाद बिहार के लिए नया अपडेट जारी किया जाएगा.
बिहार में 15 जून के आसपास हो सकती है एंट्री
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में मानसून के 15 जून के आसपास पहुंचने की संभावना है. सामान्य तौर पर भी राज्य में इसी समय मानसून प्रवेश करता है. यदि मौसम की परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो जून के दूसरे सप्ताह के अंत तक कई जिलों में बारिश शुरू हो सकती है और लोगों को गर्मी से राहत मिलने लगेगी.
फिलहाल राज्य के दक्षिण और पश्चिमी हिस्से तेज गर्मी और लू की मार झेल रहे हैं. मौसम विभाग का अनुमान है कि 10 जून तक हीट वेव की स्थिति बनी रह सकती है. हाल ही में रोहतास जिले में अधिकतम तापमान 45.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 14 वर्षों का रिकॉर्ड माना जा रहा है. इसके अलावा 13 से अधिक जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है.
जहां दक्षिण और पश्चिम बिहार के लोग गर्मी से परेशान हैं, वहीं सीमांचल के कई जिलों में मौसम सुहावना बना हुआ है. कटिहार, किशनगंज, पूर्णिया और अररिया समेत कई इलाकों में पिछले एक महीने से रुक-रुक कर बारिश और आंधी का दौर जारी है. इसके कारण वहां तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है.
अगस्त-सितंबर में कम बारिश का खतरा
मौसम वैज्ञानिकों ने एलनीनो को लेकर भी चिंता जताई है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में एलनीनो का प्रभाव बढ़ सकता है. कुछ रिपोर्टों में इसे सुपर एलनीनो जैसी स्थिति बनने की आशंका भी जताई गई है. यदि ऐसा होता है तो बिहार में मानसून कमजोर पड़ सकता है और बारिश सामान्य से कम हो सकती है.
विशेषज्ञों के अनुसार जून और जुलाई में स्थिति सामान्य दिख सकती है, लेकिन अगस्त और सितंबर में वर्षा की कमी देखने को मिल सकती है. इससे कई जिलों में सूखे जैसे हालात बनने का खतरा बढ़ सकता है. धान, मक्का, दाल और तिलहन जैसी प्रमुख फसलों की पैदावार पर भी असर पड़ सकता है.
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किसानों को दी गई सतर्क रहने की सलाह
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अभी से तैयारी शुरू करने की सलाह दी है. सिंचाई के वैकल्पिक साधनों को तैयार रखने, ट्यूबवेल और बोरिंग की व्यवस्था मजबूत करने तथा जल संचयन पर ध्यान देने को कहा गया है. इससे कम बारिश की स्थिति में फसलों को नुकसान से बचाया जा सकेगा. मौसम विभाग का मानना है कि इस साल मानसून का पैटर्न पिछले वर्षों से अलग हो सकता है. बिहार की तुलना में पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है.
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