Bihar Flood Alert: पटना में बाढ़ की स्थिति किसी एक नदी की वजह से नहीं बनती. जिले को चार प्रमुख नदी तंत्र प्रभावित करते हैं. उत्तर में गंगा, पश्चिम और दक्षिण की तरफ सोन तथा दक्षिण से उत्तर-पूर्व की ओर जाने वाली पुनपुन नदी पटना पर असर डालती है. पुनपुन की मुख्य सहायक नदी दरधा भी बाढ़ का खतरा बढ़ाती है.
इसके अलावा पटना के उत्तर में गंडक का बढ़ा हुआ जलस्तर गंगा पर दबाव बढ़ा रहा है. इससे पानी के आगे निकलने और फैलने के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं.
ड्रेनेज पाइप से ऊपर पहुंचा गंगा का पानी तो बढ़ेगी परेशानी
अधिकारियों के मुताबिक, अगर गंगा का जलस्तर शहर के ड्रेनेज पाइप के स्तर से ऊपर चला जाता है, तो बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है. ऐसी स्थिति में सीवरेज के पानी के साथ गंगा का पानी भी शहर में दाखिल हो सकता है.
बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने जिले में 31 जगहों को अति संवेदनशील और 181 जगहों को संवेदनशील घोषित किया है. इन इलाकों पर पानी बढ़ने की स्थिति में खास नजर रखी जा रही है.
गंगा से मनेर से मोकामा तक खतरा
पटना जिले में बाढ़ का सबसे बड़ा असर गंगा से जुड़ा है. मनेर से शुरू होकर दानापुर, दीघा, पटना शहर, पटना सिटी, फतुहा, खुसरूपुर, बख्तियारपुर और मोकामा तक गंगा के बढ़े जलस्तर का असर देखने को मिलता है.
गंगा का पानी सबसे पहले मनेर-दानापुर के दियारा इलाके में असर डालता है. इसके बाद दीघा, कुर्जी, बिंद टोली और पटना व पटना सिटी के दूसरे घाटों के आसपास स्थिति बिगड़ सकती है. आगे फतुहा, बख्तियारपुर और मोकामा तक इसका असर पहुंचता है.
लंबे समय तक पानी बढ़ा रहा तो तटबंध पर दबाव
गंगा का जलस्तर अगर लंबे समय तक ऊंचा बना रहता है तो इसका सीधा असर तटबंधों और शहर के ड्रेनेज आउटफॉल पर पड़ता है. इससे पानी बाहर निकालने की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.
मनेर के पास सोन नदी गंगा में मिलती है. इसलिए जब सोन और गंगा दोनों का पानी खतरे के निशान से ऊपर होता है, तब मनेर और आसपास के लोगों को दो तरफ से बाढ़ का सामना करना पड़ता है.
पहले दियारा और खेत डूबते हैं, फिर गांव तक पहुंचता है पानी
नदी का जलस्तर बढ़ने पर सबसे पहले नदी किनारे के दियारा इलाके, खेत और संपर्क रास्ते पानी में डूबते हैं. इसके बाद तटबंध के आसपास और निचले गांवों में पानी पहुंचने लगता है.
इस वजह से नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए खतरा तेजी से बढ़ सकता है. खासकर उन जगहों पर परेशानी ज्यादा होती है, जहां पानी लंबे समय तक जमा रहता है और निकासी का रास्ता बंद होने लगता है.
पुनपुन का पानी भी बढ़ा रहा खतरा
पुनपुन नदी में उफान आने से पटना जिले के कई निचले इलाकों पर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. पालीगंज, नौबतपुर, पुनपुन, संपतचक और फतुहा के निचले हिस्से इसकी चपेट में आ सकते हैं.
पुनपुन का पानी बढ़ने पर आसपास के गांवों, खेतों और सड़कों पर असर पड़ता है. इससे इन इलाकों में रहने वाले लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है.
दरधा नदी का उफान भी बड़ी चिंता
दरधा नदी पुनपुन की मुख्य सहायक नदी है. दक्षिणी पटना में दरधा का जलस्तर बढ़ना बड़े खतरे का संकेत माना जा रहा है.
धनरुआ और मसौढ़ी के आसपास दरधा के बढ़े पानी का असर गांवों, खेतों, सड़कों और तटबंधों पर दिखाई दे रहा है. दरधा में पानी बढ़ने से स्थानीय इलाकों में परेशानी बढ़ने के साथ पुनपुन पर बाढ़ का दबाव भी बढ़ सकता है.
बाढ़ के चार चरणों को ऐसे समझें
पहला चरण: नदी का पानी सबसे पहले किनारे के खेतों, कच्चे घरों और संपर्क रास्तों में फैलता है.
दूसरा चरण: पानी बढ़ने पर घाट, नदी किनारे की सड़कें और निचले इलाकों में बने घर इसकी चपेट में आने लगते हैं.
तीसरा चरण: अगर नदी का जलस्तर लंबे समय तक ऊंचा रहता है तो तटबंधों पर दबाव बढ़ जाता है. ऐसे में तटबंध से पानी रिसने या कटाव का खतरा बढ़ता है.
चौथा चरण: जब नदी का पानी शहर के नालों के आउटफॉल से ऊपर पहुंच जाता है, तो बारिश और सीवरेज का पानी बाहर नहीं निकल पाता. इसके बाद पटना के निचले इलाकों में तेजी से जलजमाव की स्थिति बन सकती है.
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2019 जैसी स्थिति से बचने की चुनौती
पटना में इस समय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बाढ़ का पानी राजधानी के निचले हिस्सों में इस तरह न फैले कि 2019 जैसी स्थिति पैदा हो जाए. उस समय शहर के कई इलाकों में नाव चलाने की नौबत आ गई थी.
इस बार गंगा के साथ सोन, पुनपुन, दरधा और गंडक के बढ़े पानी का दबाव भी चिंता बढ़ा रहा है. इसलिए तटबंधों, ड्रेनेज व्यवस्था और निचले इलाकों पर लगातार नजर रखना प्रशासन के लिए बेहद जरूरी हो गया है.
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