स्थानीय स्तर पर अवसर मिले तो बिहार देश के विकास में बड़ी भूमिका निभा सकता है : प्रो टीएन सिंह

आइआइटी पटना में शुक्रवार को ग्रामीण परिवर्तन पर संगोष्ठी आयोजित की गयी.

संवाददाता, पटना

आइआइटी पटना में शुक्रवार को ग्रामीण परिवर्तन पर संगोष्ठी आयोजित की गयी. कार्यक्रम का उद्घाटन आइआइटी पटना के निदेशक प्रो टीएन सिंह ने किया. उन्होंने कहा कि बिहार की धरती संभावनाओं से भरपूर है. यहां के लोग परिश्रमी हैं और यदि इन्हें स्थानीय स्तर पर अवसर मिले, तो ये राज्य और देश के विकास में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. कॉन्क्लेव का उद्देश्य नीति निर्माताओं, तकनीकी विशेषज्ञों, स्टार्टअप प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और जमीनी नवप्रवर्तकों को एक मंच पर लाकर ग्रामीण भारत के लिए व्यावहारिक, सतत और विस्तार योग्य समाधान खोजना था. फाउंडेशन फॉर इनोवटर्स इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एफआइएसटी) व आइआइटी पटना के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से विशेषज्ञों ने भाग लिया और कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य, लॉजिस्टिक्स, रोजगार, सहकारिता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में नवाचारों की प्रस्तुतियां दीं.

नवाचारों का ग्रामीण जीवन से जोड़

डॉ अफसर इमाम (एचएसपीसी, दिल्ली) ने सोलर कोल्ड स्टोरेज व नैनोफाइबर तकनीक से ग्रामीण कृषि की स्थिति सुधारने की बात कही. डॉ जीना मैडम (आइएलसीएस) ने सहकारिता के मॉडल को ग्रामीण आत्मनिर्भरता की कुंजी बताया. एआर यादव (एसएएसपीएल, महाराष्ट्र) ने आयुर्वेद, कृषि पर्यटन और एआइ आधारित कौशल विकास को रोजगार का आधार बताया. गोपाल कृष्णन (एसएएसपीएल, बिहार) ने बिहार केंद्रित स्किल मॉडल प्रस्तुत किया. मौके पर प्रेम शर्मा, मोहन पोलियेदथ, गौरव चौधरी, संदीप गुप्ता, वरुण कुमार सिंह, वसंत भोइर ने सहकारी आंदोलनों को ग्रामीण जागरूकता का केंद्र बताया. कॉन्क्लेव के अंत में जेके सिंह ने कार्यशाला का सार प्रस्तुत किया और भावी साझेदारियों की घोषणाएं कीं. आइआइटी पटना के डॉ प्रवीण कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कहा कि आइआइटी पटना ग्रामीण भारत के लिए टेक्नोलॉजी और नवाचार आधारित समाधान तैयार करने को प्रतिबद्ध है. कॉन्क्लेव ने ग्रामीण भारत के समग्र विकास की दिशा में एक नयी ऊर्जा का संचार किया.

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