नीतीश सरकार का बड़ा फैसला, मापी रिपोर्ट होगी ऑनलाइन, लोगों को बड़ी राहत

Bihar Bhumi: बिहार सरकार ने जमीन मापी व्यवस्था में बड़ा सुधार करते हुए तय समय सीमा लागू करने का फैसला लिया है. 1 अप्रैल 2026 से अविवादित जमीन की मापी सात दिन और विवादित जमीन की मापी 11 दिन में पूरी होगी.

Bihar Bhumi: बिहार में जमीन मापी को लेकर लंबे समय से चली आ रही दिक्कतों पर अब विराम लगने वाला है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐलान किया है कि 1 अप्रैल 2026 से राज्य में जमीन मापी की प्रक्रिया तय समय सीमा में पूरी की जाएगी. नए नियमों के तहत जिन जमीनों पर कोई विवाद नहीं है, उनकी मापी अधिकतम सात दिन में होगी. विवादित जमीनों की मापी 11 दिन के भीतर करना अनिवार्य होगा. इसके लिए अप्लाई करने वाले को निर्धारित मापी फी जमा करना होगा. सीएम नीतीश ने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की.

सीएम ने पोस्ट में क्या-क्या बताया

सीएम ने पोस्ट में बताया कि 20 नवंबर 2025 को नई सरकार के गठन के तुरंत बाद सात निश्चय-तीन कार्यक्रम लागू किया गया. इसका उद्देश्य बिहार को देश के विकसित राज्यों की केटेगरी में शामिल करना है. इस कार्यक्रम का सातवां निश्चय ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ है. इसका मकसद आम लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को कम करना और सरकारी सेवाओं को अधिक सुगम बनाना है.

सीएम ने कहा कि अब तक जमीन मापी के मामलों में अत्यधिक देरी एक गंभीर समस्या बनी हुई थी. आवेदन देने के बाद लोगों को महीनों तक इंतजार करना पड़ता था. इससे न केवल आम जनता को परेशान होती थी बल्कि कई बार यही देरी आगे चलकर भूमि विवाद का रूप ले लेती थी. समय पर मापी न होने से प्रशासन और न्याय व्यवस्था पर भी एक्स्ट्रा दबाव पड़ता था.

इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने जमीन मापी की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने का निर्णय लिया है. नए प्रावधानों के तहत मापी पूरी होने के बाद अमीन द्वारा तैयार किया गया रिपोर्ट अनिवार्य रूप से ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा. आवेदन की तारीख से 14वें दिन तक यह रिपोर्ट आवेदक के लिए उपलब्ध कराना जरूरी होगा.

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कब तक होगा निपटारा

सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि 31 जनवरी 2026 तक जमीन मापी से जुड़े सभी लंबित मामलों का निपटारा कर दिया जाएगा. इसके लिए विशेष भूमि मापी अभियान चलाया जाएगा, ताकि वर्षों से अटके आवेदनों को तेजी से सुलझाया जा सके.

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि तय समय सीमा में मापी सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं. पूरी प्रक्रिया की लगातार निगरानी भी की जाएगी. सरकार का मानना है कि इस पहल से आम लोगों को राहत मिलेगी और भूमि विवाद कम होंगे.

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लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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