रविवार से मुसलमान भाई रखेंगे रमजान उल मुबारक का पहला रोजा
फुलवारीशरीफ : बिहार, झारखंड व ओड़िशा के मुसलमानों की सबसे बड़ी एदारा इमारते शरिया, प्रसिद्ध खानकाह- ए- मुजिबिया समेत सूबे के प्रमुख मुसलिम धार्मिक व सामाजिक संस्थानों ने शुक्रवार को एलान किया है कि बिहार समेत पूरे भारत में कहीं भी रमजान उल मुबारक का चांद नहीं नजर आया है.
अब मुसलमान भाई रविवार से पाक व मुकद्दस माहे रमजान का पहला रोजा रखेंगे. वहीं, सऊदी अरब में रमजान उल मुबारक का चांद नजर आया और वहां शनिवार से ही पाक माहे रमजान का महीना शुरू हो गया. मौलाना अब्दुल जलील कासमी, काजी-ए-शरियत मरकजी दारुल क़ज़ा, इमारते शरिया , बिहार, झारखंड व ओड़िशा एवं खानकाह-ए-मुजिबिया के प्रबंधक हजरत मौलाना सैयद शाह मो मिन्हाज मुजीबी कादरी ने एलान करते हुए कहा कि पटना सहित देश के किसी भी हिस्से से चांद देखे जाने की सूचना नहीं मिली है. ऐसे में अब शनिवार को रमजान का चांद होगा और 28 मई रविवार से रहमतो व बरकतों का महीना रमजान उल मुबारक शुरू हो जायेगा. यानी रविवार से मुसलमान भाई रमजान उल मुबारक का अपना पहला रोजा रखेंगे.
इस एलान की तसदीक इमारत अहले हदीस अमीर मौलाना गाजी और शिया रुयते हेलाल कमेटी के सदर मौलाना सैयद असद रजा ने भी की है. इससे पहले राजधानी पटना सहित तमाम मुसलिम इलाके में लोग देर शाम तक अपने अपने घरों की छतों पर से चांद देखे जाने की कोशिश करते रहे, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी.
इसके बाद लोग टीवी और एक-दूसरे से मोबाइल के जरिये चांद के एलान के बारे में तसदीक का प्रयास करने में लगे रहे. देर शाम जब मुसलिम ऐदारों ने चांद नहीं देखे जाने और रमजान का पहला रोजा रविवार से रखने का एलान किया, तो लोगों ने एक-दूसरे को मुबारकवाद देना शुरू कर दिया. रमजान को लेकर लोगों में उत्साह और उमंग का माहौल है.
फुलवारीशरीफ : रोजा रखने का मतलब भूखा-प्यासा रहना नहीं, बल्कि अपने आप को सभी तरह की बुराइयों से रोकना है. रोजा रखने के बाद मुसलमान को गंदी बातों की तरफ जाना तो दूर उसके बारे में सोचना भी गुनाह है. दूसरों के बारे में खराब सोच कर, झूठ या तकलीफ पहुंचाने वाली बात कह कर पीठ पीछे बुराई करके रोजा नहीं रखा जा सकता. रोजा तमाम बुराइयों को खत्म करने की जड़ है. इस महीने में हर मुसलमान को चाहिए कि वह रोजा रख कर ज्यादा- से- ज्यादा कुरान पढ़े. अच्छे काम करे. गरीबों की सहायता करे और किसी को तकलीफ न पहुंचाएं .
आम दिनों में मुसलमान पांच बार नमाज पढ़ता है, मगर रमजान के पवित्र महीने में 6 नमाज अदा की जाती है. छठी नमाज को नमाजे तरावीह कहते हैं, जिसके बारे में है कि जिस व्यक्ति ने सारा दिन रोजा रखा और रात को तरावीह की नमाज अदा न की तो उसका रोजा पूरा नहीं होता. एक मुसलमान अपने खुदा के हुक्म से सुबह सेहरी से लेकर शाम इफ्तार के वक्त तक भूखा-प्यासा रहते हुए अपने खुदा की इबादत करते हुए अल्लाह के हर हुक्म को मानता है और कोशिश करता है कि इस पवित्र महीने में जितने ज्यादा- से -ज्यादा अच्छे काम हों, वह उनको करता है .
इस महीने में अल्लाह अपने हर बंदे के लिए रहमत का दरवाजा खोल देता है .रमजानुल मुबारक का महीना साल में एक बार रहमत व बरकत की बारिश के साथ ही गुनाहों की मगफिरत की सौगात लेकर आता है. हजरत पैगंबर साहेब ने इसी माह कुरानशरीफ नाजिल कराया ताकि इसकी तिलावत से मुल्क और पूरे समाज में शांति- अमन और भाईचारे को मजबूती मिले. इस महीने को रहमतों और बरकतो का महीना भी कहा जाता है.
