पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की बिजली कंपनियों को बिल देने की प्रक्रिया को दुरुस्त करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि राज्य के उपभोक्ता बिजली बिल का भुगतान करना चाहते हैं. इसके लिए बिजली कंपनियों को अपनी प्रक्रिया ठीक करनी होगी, ताकि उपभोक्ता समय पर बिजली बिल का भुगतान आसानी से कर सकें.
मुख्यमंत्री गुरुवार को सीएम सचिवालय संवाद में ऊर्जा विभाग के 2650.51 करोड़ की योजनाओं के शिलान्यास उद्घाटन व लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे. मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली बिल की शिकायतें कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं. पूरी प्रक्रिया को दुरुस्त करना होगा. इससे वितरण कंपनियों की इफिसिएंसी बढ़ेगी. समय पर बिल दें, तो समय पर ही भुगतान हो सकेगा. बिजली बिल में सुधार के लिए भी पहल की गयी है. लोगों के सामने बिलिंग की जायेगी. मोबाइल के माध्यम से बिल की जानकारी दी जायेगी. स्पॉट बिलिंग की भी सुविधा दी जा रही है.
सब्सिडी भी बिजली बिल में अंकित होगी. उपभोक्ता को सब्सिडी घटा कर बिल का भुगतान करना होगा. लोगों को जानकारी होगी कि बिजली की रेट क्या है और सरकार कितनी सब्सिडी दे रही है? साथ ही सरकार भी देख सकेगी कि हम उपभोक्ताओं को कितनी सब्सिडी दे रहे हैं और बिजली कंपनियों की इफिसिएंसी कितनी है?
सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि लोगों को गुणवत्ता पूर्ण बिजली मिले. पावर फ्लक्च्यूवेशन नहीं होना चाहिए. जब सब कुछ डेवलप हो रहा है, तो बिजली की क्वालिटी में भी सुधार होगा, यह भी चुनौती है. बिजली की खपत और सुविधा बढ़ रही है, तो राशि भी बढ़ना ही है.
उन्होंने बिजली वितरण कंपनियों को अपनी इफिसिएंसी बढ़ाने और नेचुरल लॉस से आगे किसी प्रकार का लॉस नहीं करने की भी सलाह दी है. बिजली वितरण में फ्रेंचाइजी के काम को मुख्यमंत्री ने बेकार बताया और इसके चक्कर में नहीं पड़ने की सलाह भी दी. उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा फ्रेंचाइजी से मुक्ति पाने की है. फ्रेंचाइजी के कारण ही कई गांवों में अब तक बिजली नहीं पहुंची है.
बिजली नहीं थी, तो कोई कुछ नहीं बोलता था
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब बिजली नहीं थी, तो कोई कुछ नहीं बोलता था. आज जब बिजली है और एक घंटे के लिए कट जाये, तो कहने लगते हैं कि बिजली गायब हो गयी. लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गयी हैं. देखना चाहिए कि हम कहां थे और कहां पहुंच गये. अभी तो यात्रा शुरू हुई है और यात्रा पूरी होने तो दीजिए. इस पर विपक्ष भी सवाल उठाता है, लेकिन उनके पास यही तो काम है.
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण विद्युतीकरण में बेहतर काम के लिए नालंदा को पुरस्कार मिलने पर खुशी जतायी और कहा कि कहीं इसे कोई अपनी तरफ से व्याख्या न करें. एक जिले को पुरस्कार मिला है, ऐसे ही काम करते रहें, ताकि पूरे बिहार को पुरस्कार मिले. समारोह में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, मुख्यमंत्री के ऊर्जा सलाहकार पीके राय, ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, सचिव अतीश चंद्रा व सचिव मनीष कुमार, ऊर्जा विभाग के आर लक्ष्मणन, संदीप कुमार समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे.
जरूरत के हिसाब से खर्च करें बिजली
मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से जनसंपर्क अभियान चलाने का निर्देश दिया और कहा कि लोगों से अपील करें कि बिना वजह बिजली की खपत न करें. जरूरत के हिसाब से ही बिजली की खपत करें. आखिर में बिल का भुगतान तो उन्हें ही करना होता है. जब बल्ब जलाना हो, तभी जलाएं. कम बिजली खपतवाले बल्ब, पंखे भी आ गये हैं. उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा ही असली बिजली है. कोयला एक दिन खत्म हो जायेगा. अगर सूर्य का प्रकाश नहीं मिले, तो सब खत्म हो जायेगा. इस अक्षय ऊर्जा पर बिजली विभाग कैंपेन चलाये और लोगों को इसके लिए जागरूक करें.
पर्यावरण के लिहाज से कहीं-कहीं बिजली के पोल या तार नहीं जा सकते हैं, वहां अक्षय ऊर्जा से बिजली पहुंचायी जाये. उन्होंने कहा कि परचा तैयार करा लें और जिनके यहां कनेक्शन है, उनके घरों के दरवाजे तक पहुंचा दें या चिपका दें. इसका व्यापक असर होगा. नयी पीढ़ी को इसकी जानकारी मिल जाये, तो वह बाकी को जागरूक कर देगी.
इस साल तक बचे 623 गांवों में पहुंचेगी बिजली
राज्य भर में 623 गांव ऐसे हैं, जहां अब तक बिजली नहीं पहुंची है. इनमें सारण समेत दियारे के 157, रोहतास-कैमूर में पहाड़ी क्षेत्र के 218 , कटिहार के 228, मुजफ्फरपुर के 24 और भागलपुर के छह गांव शामिल हैं. इस साल के अंत तक (दिसंबर, 2017) इन सभी गांवों में बिजली पहुंचा दी जायेगी और दिसंबर, 2018 तक सभी घरों में बिजली का कनेक्शन दे दिया जायेगा. हमें अपना काम दृढ़ता-संकल्प से करना चाहिए ऊर्जा विभाग पर भरोसा है.
