कमर्शियल सिनेमा का प्रभाव नहीं हो रहा कम
कमर्शियल सिनेमा का प्रभाव नहीं हो रहा कमएक ओर जहां बॉलीवुड में कम बजट की फिल्मों ‘‘मसान” और ‘‘द लंच बॉक्स” की सफलता के बीच कमर्शियल सिनेमा की प्रासंगिकता कम होती प्रतीत हो रही है वहीं दूसरी ओर अभिनेता रितेश देशमुख का मानना है कि अभी भी लोग कमर्शियल सिनेमा का आनंद लेते हैं बशर्ते […]
कमर्शियल सिनेमा का प्रभाव नहीं हो रहा कमएक ओर जहां बॉलीवुड में कम बजट की फिल्मों ‘‘मसान” और ‘‘द लंच बॉक्स” की सफलता के बीच कमर्शियल सिनेमा की प्रासंगिकता कम होती प्रतीत हो रही है वहीं दूसरी ओर अभिनेता रितेश देशमुख का मानना है कि अभी भी लोग कमर्शियल सिनेमा का आनंद लेते हैं बशर्ते उसमें कुछ रोचक हो. रितेश ने कहा, ‘‘ समय बदल रहा है…दर्शक हर तरह की फिल्मों को स्वीकार कर रहे हैं……बस, फिल्म का विषय अच्छा होना चाहिए…यह कहना गलत होगा कि कमर्शियल सिनेमा का प्रभाव कम हो रहा है. दर्शक स्वतंत्र फिल्मों को स्वीकार कर रहे हैं. मामी जैसे उत्सव इन फिल्मों को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं. ” ‘हाउसफुल’, ‘क्या कूल हैं हम’ और ‘मस्ती’ जैसी कई कॉमेडी फिल्मों में 36 वर्षीय रितेश अपनी कॉमेडी का लोहा मनवा चुके हैं. उन्होंने कहा, ‘‘ मेरा मानना है कि कई लोग कॉमेडी कर सकते हैं. कई प्रतिभाशाली लोग कॉमेडी फिल्मंंे कर रहे हैं. मुझे भी कॉमेडी करने में मजा आता है….मैं आगे भी कॉमेडी फिल्में करता रहूंगा।
