पटना : रिटायरिंग रूम व पार्सल घर नहीं

पटना : पटना जंक्शन के विकल्प के रूप में ए-श्रेणी का पाटलिपुत्र जंक्शन बनाया गया, जहां रोजाना 25 एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनें गुजरती हैं. इसके अलावा 16 एक्सप्रेस ट्रेनें सप्ताह में एक-दो दिन गुजरती हैं. नियमित व साप्ताहिक ट्रेनों से 25-30 हजार यात्रियों की आवाजाही होती है, जिससे रोजाना रेलवे को 10 लाख रुपये से […]

पटना : पटना जंक्शन के विकल्प के रूप में ए-श्रेणी का पाटलिपुत्र जंक्शन बनाया गया, जहां रोजाना 25 एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनें गुजरती हैं. इसके अलावा 16 एक्सप्रेस ट्रेनें सप्ताह में एक-दो दिन गुजरती हैं. नियमित व साप्ताहिक ट्रेनों से 25-30 हजार यात्रियों की आवाजाही होती है, जिससे रोजाना रेलवे को 10 लाख रुपये से अधिक राजस्व की प्राप्ति होती है. बावजूद सुविधाएं नदारद हैं.
जंक्शन पर सिर्फ डोरमेटरी की व्यवस्था : कामाख्या-दिल्ली नॉर्थ-इस्ट एक्सप्रेस अहले सुबह तीन बजे, दिल्ली-डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस सुबह 4:30 बजे, अगरतला-आनंद विहार राजधानी एक्सप्रेस रात 11:00 बजे, सीमांचल एक्सप्रेस रात 11:10 बजे आती है. इन ट्रेनों के यात्रियों के ठहरने के लिए सिर्फ डोरमेटरी की व्यवस्था की गयी है. जंक्शन पर रिटायरिंग रूम की सुविधा नहीं है. खासकर, राजधानी एक्सप्रेस व नॉर्थ-इस्ट एक्सप्रेस के यात्रियों को दो-चार घंटे तक जंक्शन पर रुकने में काफी परेशानी झेलनी पड़ती है.
प्लेटफॉर्म बना है गोदाम : जंक्शन पर कई ट्रेनों से पार्सल लोड व अनलोड होता है. लेकिन, पार्सल के लिए जंक्शन पर कोई बेहतर व्यवस्था नहीं की गयी है. स्थिति यह है कि पार्सल घर नहीं होने से प्लेटफॉर्म नंबर एक गोदाम बना रहता है. इससे यात्रियों को काफी परेशानी होती है.

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