पटना : भवन निर्माण से जुड़े बिहार के लगभग 10 लाख मजदूर प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना से जुड़ सकते हैं. मजदूरों को पहले पांच साल का प्रीमियम नहीं देना होगा. प्रीमियम की आधी राशि बिहार सरकार और आधी केंद्र सरकार देगी. पांच साल के बाद मजदूरों को प्रीमियम की आधी राशि खुद देनी होगी और बाकी केंद्र सरकार देगी. श्रम संसाधन विभाग ने बुधवार को बैठक कर यह निर्णय लिया है.
फरवरी, 2019 में योजना शुरू की गयी थी. योजना में फुटपाथी, कृषि, बीड़ी मजदूर, रेहाड़ी – पटरी पर काम करने वाले, चमड़ा व हस्तकरघा श्रमिकों को इस योजना से जोड़ना है. एक आकलन के अनुसार बिहार में इस श्रेणी के मजदूरों की संख्या एक करोड़ से अधिक है, लेकिन अब तक बिहार में मात्र एक लाख 75 हजार मजदूर ही इस योजना से जुड़ पाये हैं. इसलिए बिहार सरकार ने निर्णय लिया है कि बिहार भवन सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड से निबंधित मजदूरों को इस योजना से जोड़ा जाये.
18 से 40 वर्ष के मजदूरों को ही जोड़ना है: 18 से 40 वर्ष के मजदूरों को ही जोड़ना है. इसलिए निबंधित 17 लाख में से लगभग 10 लाख मजदूर इस योजना में आ जायेंगे. विभागीय मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में निबंधित निर्माण कामगारों को प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन जोड़ा जायेगा. साथ ही, राज्य सरकार पांच वर्षों के लिए श्रमिकों का अंशदान भी देगी.
