44 विभागों को मिल रहे ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कर्मचारी, हर माह मांगी जा रहीं रिक्तियां
पटना : शिक्षा विभाग प्रदेश के सभी 44 विभागों को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मसलन कार्यालय परिचारी, चपरासी, पत्र वाहक और अन्य समकक्ष पदों पर उच्चतर शैक्षणिक योग्यता वाले प्रतिभाशाली कर्मचारी दे रहा है. 25 फरवरी, 2021 तक 1850 कर्मचारी मुहैया कराये जाने हैं. इसके लिए शिक्षा विभाग प्रति माह सभी विभागों से रिक्तियां मांग रहा है. इन कर्मचारियों में करीब 15-20 फीसदी से अधिक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी स्नातक, स्नातकोत्तर, एलएलबी और बीबीए डिग्री धारी हैं. इनका मासिक वेतन बीस से 24 हजार के बीच होगा. इस पोस्ट के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक है. यह समूची कवायद हाइकोर्ट के आदेश पर हो रही है.
बिना प्रतियोगिता परीक्षा के होगी नियुक्ति : ये नियुक्तियां शिक्षा विभाग के जन शिक्षा निदेशालय के जरिये की जा रही हैं और बिना प्रतियोगिता परीक्षा के हो रही हैं. इसके लिए पात्र उम्मीदवारों की तलाश जन शिक्षा निदेशालय की तरफ से जिला स्तर पर गठित कमेटियां कर रही हैं. इनमें वे ही उम्मीदवार पात्र माने गये हैं, जो 1980 से 2001 के बीच साक्षरता के प्रसार के लिए कार्यरत थे. इन्हें अब अनौपचारिक शिक्षा अनुदेशक के रूप में चयनित किया जा रहा है.
हालांकि ये चतुर्थ श्रेणी के पद पर काम करेंगे. साक्षरता प्रसार के लिए वह योजना बंद हो चुकी है. लिहाजा हाइकोर्ट ने इन्हें फिर से चतुर्थ श्रेणी के वेतनमान(18000 और अन्य ) पर रखने के निर्देश 2017 में दिये थे. तब से यह कार्रवाई लगातार जारी है. 80 और 90 के दशक में काम करने वाले ऐसे 7800 लोग पहचाने गये हैं. इनमें अभी तक 5800 से अधिक नियुक्तियां विभिन्न विभागों में की जा चुकी हैं.
नियुक्तियों में आ रही है दिक्कत
इन नियुक्तियों में नवंबर में खास दिक्कत हो रही है. शेष बची दो हजार नियुक्तियों में 1850 नियुक्तियां केवल पिछड़े वर्ग की हैं. लेकिन इनके पात्र उम्मीदवार पद के अनुरूप मौजूद ही नहीं हैं. शिक्षा विभाग इस मामले में राज्य शासन से मार्गदर्शन मांगने जा रहा है. जबकि सामान्य वर्ग की नियुक्तियां ही नहीं बची हैं. जबकि उनके पात्र उम्मीदवार काफी हैं. उल्लेखनीय है कि इन नियुक्तियों में रोस्टर का पालन अनिवार्य है.
नियुक्तियों का काम जारी
अनौपचारिक शिक्षा अनुदेशक के पदों पर नियुक्तियों का काम जारी है. इसमें काफी संख्या में अच्छी शैक्षणिक योग्यता वाले लोग हैं. कुछ तकनीकी दिक्कत आ रही है. इस मामले में उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा जा रहा है. कोर्ट के निर्देशानुसार कार्रवाई की जा रही है.
डॉ रामानुज प्रसाद, निदेशक, जन शिक्षा निदेशालय, बिहार
