पटना : हम दुनिया के तमाम दूसरे देशों में जब भी जाते हैं तो हमें वहां सबकुछ अच्छा लगता है. अच्छी सड़कें, अच्छे स्कूल, अच्छी स्वास्थ्य व्यवस्था और बेहतर ट्रैफिक. हम उससे बहुत सकारात्मक तौर पर प्रभावित होते हैं लेकिन यह नहीं देखते कि उनके यहां जनसंख्या पर कितनी लगाम लगी हुई है.
हमारे यहां कठिनाइयां दिखायी देती है क्योंकि जनसंख्या बहुत ज्यादा है. हम देशभर में आबादी में तीसरे नंबर पर हैं जबकि क्षेत्रफल के लिहाज से 12 वें नंबर पर हैं. यानी जमीन पर कितना दबाव है. सरकार कितना कुछ भी करती है तो वह आबादी के मुताबिक कम पड़ता है.
ये बातें स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने होटल मौर्य में सेंटर फॉर कैटालाइजिंग चेंज द्वारा आयोजित नया दौर कार्यक्रम में कही. उन्होंने आगे कहा कि हम पॉपुलेशन कंट्रोल पर काम कर रहे हैं लेकिन यह केवल सरकार द्वारा करने से नहीं होगा. बाल विवाह, गर्भनिरोधकों का कम इस्तेमाल, इस विषय में अज्ञानता आदि कारण इसमें शामिल हैं. सरकार ने बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए पूरा अभियान चलाया है.
अध्ययन में पता चला कि 12 वीं क्लास पास बच्चियों का फर्टिलटी रेट 2 फीसदी है. ग्रेजुएशन की बच्चियों का महज 1.6 प्रतिशत है. हमने 2005 में 4 फीसदी के फर्टिलिटी रेट को 3.2 फीसदी तक लाया है. इसे 2.1 फीसदी तक लाने के लक्ष्य पर हम काम कर रहे हैं.
19 साल की उम्र में जब मेरी शादी हुई: मौके पर विधान पार्षद रीना यादव ने कहा कि महिलाओं को गर्भनिरोधकों पर बात करना होगा. 19 साल में मुझे पता नहीं था कि बच्चे कैसे पैदा होते हैं?
सेक्स क्या होता है? पति से पूछा तो उन्होंने कहा कि भाभी से बात करो. हम क्या करते? इस कारण मैं अपने अनुभवों से कहूंगी कि अपने बच्चों से बात करिए, उन्हें सेक्स एजुकेशन दीजिए. कार्यक्रम में डब्लूएचओ के डॉ नॉजर शेखर ने युवाओं को जागरूक होने का संदेश दिया और अपराजिता गोगाेई ने गर्भनिरोधकों के प्रयोग के आंकड़े बताये.
