सामान्य वर्ग की सीटें हो गयीं कम
पटना : आर्थिक रूप से पिछड़ों को कॉलेजों में दस प्रतिशत आरक्षण तो दिया गया. लेकिन, कॉलेजों में सीटों में बढ़ोतरी नहीं की गयी. जबकि, दस प्रतिशत सीटों को बढ़ाये जाने का भी प्रावधान था. इसका नतीजा यह है कि सामान्य वर्ग का कटऑफ इस वर्ष काफी हाइ चला गया.
सभी वर्ग के लोग जो बिना आरक्षण के नामांकन लेते हैं, उनका 50 प्रतिशत कोटा था. इनका पहले से कटऑफ हाइ रहता था. लेकिन, अब दस प्रतिशत सीटें आरक्षित वर्ग को जाने से सिर्फ 40 प्रतिशत सीटें ही अनारक्षित वर्ग को मिला है. अगर 10% सीटें बढतीं, तो ऐसा नहीं होता. लेकिन, इससे नुकसान उन छात्रों को ही होगा, जो आर्थिक रूप से कमजोर नहीं हैं.
आर्थिक पिछड़ों का आवेदन काफी कम : चूंकि काफी कम समय दिया गया था. आर्थिक रूप से पिछड़ों का आवेदन ही काफी कम आया है. कारण यह था कि बड़ी संख्या में छात्र कुछ समझ ही नहीं पाये कि इसमें क्या करना है. स्थिति को पूरी तरह से स्पष्ट नहीं किया गया. अखबारों के माध्यम से जो छात्र समझ पाये, उन्होंने आवेदन किया है.
कन्फ्यूजन की स्थिति
कॉलेजों में आर्थिक रूप से आरक्षण किसी भी वर्ग के छात्रों को देने की बात कहीं जा रही है. विवि के अधिकारी भी यही बात कह रहे हैं.
लेकिन, जो फॉर्म सरकार की ओर से जारी किया गया है, उसमें ऐसा घोषणापत्र देना है कि वे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा या अत्यंत पिछड़ा वर्ग में नहीं अधिसूचित नहीं हैं. पीयू के सिंडिकेट सदस्य सुधाकर सिंह ने भी सभी वर्ग को आर्थिक आरक्षण देने का विरोध करते हुए कहा है कि यह सवर्ण आरक्षण है न कि सभी वर्ग का आरक्षण है.
