पटना: पटना मेट्रो रेल परियोजना को तेजी से जमीन पर उतारने की पहल फिर से आरंभ हो गयी है. सरकार 15 अगस्त के पहले दिल्ली के तर्ज पर मेट्रो कॉरपोरेशन का गठन कर लेगी. नगर विकास मंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि पटना मेट्रो रेल की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) 15 अगस्त के पहले तैयार कर ली जायेगी. साथ ही इसे केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेज दिया जायेगा.
इस संबंध में उनकी बात केंद्रीय पदाधिकारियों से भी हुई है. इस परियोजना पर 40 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे. श्री चौधरी मंगलवार को मेट्रो रेल परियोजना की समीक्षा कर रहे थे. इसमें राइट्स के पदाधिकारियों ने भाग लिया. मंत्री ने बैठक के बाद कहा कि पटना मेट्रो रेल परियोजना का निर्माण चार चरणों में होगा. सबसे पहले कोरिडोर संख्या-एक की आधारशिला रखी जायेगी. कोरिडोर संख्या-एक का आरंभ दानापुर कैंट से होकर बेली रोड होते हुए मीठापुर बस स्टैंड के पास बाइपास चौक पर समाप्त होगा. मेट्रो रेल के लिए मार्ग रेखा का निर्धारण किया जा चुका है.
इसमें आंशिक संशोधन की आवश्यकता होगी. यह ध्यान रखा जायेगा कि किसी भी रूट में महत्वपूर्ण अस्पताल या बस पड़ाव नहीं छूटे. रूट संख्या-एक में आइजीआइएमएस के पास स्टेशन बनाया जायेगा. श्री चौधरी ने बताया कि मेट्रो रेल चलाने के लिए यह आकलन किया गया है कि जमीन के ऊपरी पथ से रेल पथ निर्माण पर करीब 200 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर खर्च होगा. इसी तरह से भूमिगत रेल पथ के निर्माण पर प्रति किलोमीटर 450 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. रूट संख्या एक की लंबाई 14.5 किमी है. रूट संख्या-दो की दीघा से रेलवे स्टेशन की दूरी 5.5 किमी होगी. रूट संख्या-तीन पटना रेलवे स्टेशन से अगमकुआं की लंबाई 16 किमी है. चौथा रूट मीठापुर बाइपास चौक से एम्स तक की दूरी 11 किमी है. हर रूट में कुछ दूरी भूमिगत रेल पथ का निर्माण कराया जायेगा.
मेट्रो रेल से रोजाना करीब साढ़े छह लाख यात्री लाभान्वित होंगे. दानापुर कैंट से मीठापुर बाइपास चौक तक तीन लाख, रेलवे स्टेशन से लेकर प्रस्तावित नये बस स्टैंड दीदारगंज तक करीब दो लाख 75 हजार व विकास भवन से दीघा तक 80 हजार दैनिक यात्री यात्र करेंगे.
सम्राट चौधरी, नगर विकास मंत्री
