कांग्रेस के लिए बाहरी के साथ अंदरूनी राजनीति बड़ी चुनौती

संगठन में अगड़ों व पिछड़ों की खटास और महत्वाकांक्षा भी नजर आने लगी है पटना : बिहार कांग्रेस के लिए बाहरी के साथ अंदरूनी राजनीति बड़ी चुनौती के रूप में फिर से सामने आने लगी है. हाल ही में पार्टी के नये प्रदेश अध्यक्ष और प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष सहित अन्य महत्वपूर्ण पदों पर […]

संगठन में अगड़ों व पिछड़ों की खटास और महत्वाकांक्षा भी नजर आने लगी है
पटना : बिहार कांग्रेस के लिए बाहरी के साथ अंदरूनी राजनीति बड़ी चुनौती के रूप में फिर से सामने आने लगी है. हाल ही में पार्टी के नये प्रदेश अध्यक्ष और प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष सहित अन्य महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति के साथ ही अंदरूनी राजनीति पर विराम लगने की बात कही जा रही थी, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा.
वहीं संगठन में अगड़ों और पिछड़ों की खटास और महत्वाकांक्षा भी नजर आने लगी है. इन सबसे संगठन की एकता और मजबूती में संशय पैदा होने लगा है. ऐसेे में पार्टी के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल के लिए भी पार्टी को एकजुट रखना और आगामी चुनावों में पार्टी को बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करना बड़ी चुनौती होगी.
श्रीबाबू के जयंती समारोह में दिखी थी समन्वय की कमी : सूत्रों का कहना है कि पिछले दिनों बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ श्रीकृष्ण सिंह की जयंती के अवसर पर भी नेताओं के बीच समन्वय की कमी और आपसी फूट नजर आयी. मंच पर कांग्रेस के बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल की उपस्थिति में नये प्रदेश अध्यक्ष डॉ मदन मोहन झा और समारोह के आयोजक व प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष डॉ अखिलेश सिंह मौजूद रहे.
वहीं, सीएलपी लीडर सदानंद सिंह सहित प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी, डॉ अशोक कुमार, डॉ समीर कुमार सिंह और श्याम सुंदर सिंह धीरज मौजूद नहीं थे. इस कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी सचिव वीरेंद्र सिंह राठौर और राजेश लिलोटिया के अलावा पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार भी शामिल नहीं हुईं.
आपसी फूट से इन्कार
हालांकि, कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता इस घटना को महज इत्तफाक बताते हैं. वे पार्टी नेताओं के बीच आपसी फूट से इन्कार करते हैं और कहते हैं कि जो लोग समारोह में अनुपस्थित रहे इसके पीछे उनकी कुछ व्यक्तिगत वजहें थीं.
जब उनसे पूछा जाता है कि प्रदेश कांग्रेस के नये पदाधिकारियों की नियुक्ति के बाद बिहार कांग्रेस का यह पहला बड़ा कार्यक्रम था. इसमें सबकी उपस्थिति से पार्टी की एकजुटता दिखती तो इस सवाल पर वे चुप्पी साध लेते हैं.

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