भारत बंद :एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ सवर्णों का प्रदर्शन, बिहार में रहा असरदार, हुई फायरिंग, हंगामा, आगजनी

पटना/भोपाल/लखनऊ : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार द्वारा लाये गये अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निरोधक) कानून में संशोधन को लेकर सवर्ण संगठनों द्वारा आहूत एक दिवसीय भारत बंद का असर, बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड सहित कई राज्यों में दिखा. मध्यप्रदेश सरकार ने बंद के मद्देनजर प्रदेश के अधिकतर जिलों […]

पटना/भोपाल/लखनऊ : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार द्वारा लाये गये अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निरोधक) कानून में संशोधन को लेकर सवर्ण संगठनों द्वारा आहूत एक दिवसीय भारत बंद का असर, बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड सहित कई राज्यों में दिखा. मध्यप्रदेश सरकार ने बंद के मद्देनजर प्रदेश के अधिकतर जिलों में एहतियाती तौर पर धारा 144 लगा दी थी और समूचे प्रदेश में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किये गये थे. वहीं, उत्तर प्रदेश के बलिया और नोएडा में बंद के दौरान पथराव की घटना सामने आयी है.
खास तौर पर बिहार में बंद का व्यापक असर दिखा. कई जगह फायरिंग, तोड़फोड़ व आगजनी की घटनाएं हुईं. प्रदर्शनकारियों व पुलिस की भिड़ंत में कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गये. बेगूसराय में जदयू विधायक श्याम रजक, जहानाबाद में एएसपी आपरेशन, मुजफ्फरपुर में पप्पू यादव पर बंद समर्थकों ने हमला कर दिया. कई जगह आगजनी, रेल- सड़क यातायात जाम कर दिया गया.
बेगूसराय में इनियार ढाला के पास शाम चार बजे जदयू विधायक श्याम रजक जाम के दौरान वहां से गुजर रहे थे. 100 प्रदर्शनकारियों ने उनकी गाड़ी पर हमला कर दिया. इसमें विधायक घायल हो गये. गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गयी. जहानाबाद के घोषी में दोपहर 12 बजे करीब 60 बंद समर्थकों ने पुलिस पर पथराव कर दिया. इसमें अपर पुलिस अधीक्षक अभियान घायल हो गये.
मुजफ्फरपुर में एलएस कॉलेज तथा विवि परिसर में तालाबंदी कर रोड जाम कर दिया. थाना काजी मोहम्मदपुर क्षेत्र में लेनिन चौक पर बाइक के शोरूम पर पथराव कर दिया. मुजफ्फरपुर सदर क्षेत्र में सुबह आठ बजे खबड़ा के निकट बंद समर्थकों ने सांसद पप्पू यादव के काफिले को आगे नहीं बढ़ने दिया. बंद समर्थकों की उनसे झड़प हो गयी. घायल सांसद को वहां से लौटना पड़ा. पटना में बंद के दौरान पुलिस ने आयकर गोलंबर के पास से 25 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया जिनको निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया. थाना दीदारगंज में जाम बाईपास खुलवाने गयी पुलिस पर पथराव हो गया.
इसमें एएसआई सिबतुललाह खान घायल हो गये. पुलिस ने 10 बाइक जब्त करते हुए एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया. गया में 1000 प्रदर्शनकारियों की भीड़ उपद्रव मचाते हुये बेलागंज बाजार को बंद कराया, वाहनों पर पथराव किया गया. स्कूल बस पर को भी नहीं छोड़ा. पत्थर लगने से एक छात्र घायल हो गया. पुलिस पर भी पथराव किया गया. नवादा में ग्राम जगदेव के पास बंद समर्थकों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया. पटना में राजेंद्र नगर टर्मिनल पर सवर्ण सेना ने रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन किया. गोपालगंज के बरौली में सड़क जाम कर दी. आरा में रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रोकर प्रदर्शन किया गया.
वहीं, मध्यप्रदेश में भिंड, शिवपुरी एवं ग्वालियर सहित कुछ अन्य जिलों में स्थानीय प्रशासन ने एहतियाती तौर पर स्कूलों की छुट्टी करने की घोषणा कर दी थी. सभी पेट्रोल पंप मालिकों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे थे. वहीं, उत्तर प्रदेश के बलिया और नोएडा में बंद के दौरान पथराव की घटना सामने आयी है. बलिया में बंद के दौरान पथराव में छह पुलिसकर्मी और तीन अन्य लोग घायल हो गये. आंदोलन समर्थकों की भाजपा के बलिया सदर के विधायक आनंद स्वरूप शुक्ला से भी झड़प हुई. समर्थकों ने विधायक से आंदोलन में शरीक होने का अनुरोध किया, लेकिन विधायक ने मना कर दिया. उधर, उत्तराखंड में भी मिला-जुला असर देखने को मिला. बंद के आह्वान पर राजधानी देहरादून में कोई खास असर दिखायी नहीं दिया और स्कूल, कॉलेज, पेट्रोल पंप, बाजार आदि अन्य दिनों की तरह खुले. राजस्थान में भी व्यापक असर देखा गया. बंद के समर्थन में बाजार में दुकानें, व्यावसायिक संस्थान, स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थाएं को बंद रही.
मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान सहित अन्य राज्यों में दिखा असर
कहां क्या हुआ
बेगूसराय : पूर्व मंत्री श्याम रजक पर हमला, मुजफ्फरपुर में पप्पू यादव से समर्थक उलझे
गोपालगंज, वैशाली, नालंदा, भोजपुर, बेगूसराय, बक्सर, सीवान, जहानाबाद, सारण में बंद समर्थकों ने की आगजनी
मुजफ्फरपुर : एनएच जाम, राहगीरों से मारपीट, बीआरएबीयू और कॉलेजों को भी बंद कराया, परीक्षा रद्द
दरभंगा : छह घंटे फंसी रहीं ट्रेनें, झड़प में कई घायल
सीतामढ़ी : बंद के दौरान लाठीचार्ज, दुकानें बंद
मोतिहारी : जाम हटाने गयी पुलिस को भांजनी पड़ीं लाठियां
भागलपुर : 12 घंटे के बाद रेल परिचालन शुरू हुआ
गया : 1000 प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने बाजार बंद कराया
आरा : भोजपुर में पुलिस पर हमला, करनी पड़ी फायरिंग
आरा : एससी एसटी कानून में संशोधन और आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर पूरे देश के साथ ही प्रदेश के गोपालगंज, वैशाली, नालंदा, भोजपुर, बेगूसराय, बक्सर, सीवान, जहानाबाद, सारण समेत कई जिलों में बंद समर्थकों ने आगजनी कर रेल व सड़क यातायात बाधित किया और बाजार बंद कराये.
बंद समर्थकों ने ट्रेनों के इंजन के ऊपर चढ़कर प्रदर्शन किया. भोजपुर में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को फायरिंग करना पड़ी. लोगों ने सुबह से ही सड़कों पर बांस-बल्ला व गाड़ियों को बीच रोड पर खड़ा कर जाम कर दिया. इस दौरान लोगों ने आरा स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन को भी रोक दिया. जाम होने के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग गयी थीं.
बंद के दौरान पूमरे की 53 ट्रेनें हुईं प्रभावित
पटना : एससी-एसटी एक्ट के विरोध में सवर्ण समाज के भारत बंद के दौरान गुरुवार को पूर्व मध्य रेल (पूमरे) की 53 ट्रेनें प्रभावित हुईं. इसमें सबसे अधिक समस्तीपुर मंडल में दरभंगा-लहेरियासराय रेलखंड के बीच नौ ट्रेनों को रोका गया. वहीं दानापुर मंडल में राजगीर और नालंदा के बीच पांच ट्रेनों को रोका गया. वहां सबसे अधिक तीन घंटा 25 मिनट तक ट्रेनें रुकी रहीं. इस दौरान हजारों रेल यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा. इस दौरान किसी घटना की सूचना नहीं है.
रेलवे के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि भारत बंद के दौरान सुबह सात बजे से ही पूमरे के 36 स्टेशनों पर प्रदर्शनकारियों ने पहुंचकर ट्रेनों का परिचालन बाधित करना शुरू कर दिया.
उन्हें आरपीएफ और जीआरपी के जवानों ने रोकने का प्रयास किया. कई स्टेशनों पर प्रदर्शनकारियों की संख्या 25-30 होने पर तो पांच से दस मिनट में ही ट्रेनों को रवाना कर दिया गया. वहीं कई स्टेशनों पर प्रदर्शनकारियों की संख्या 100 से अधिक होने पर सुरक्षा बल के जवानों को इनपर काबू करने में मुश्किल हुई.
सवर्ण सेना ने क्यों करवाया भारत बंद
एससी-एसटी संशोधन विधेयक 2018 के जरिये मूल कानून में धारा 18ए जोड़ी जायेगी. इसके जरिये पुराने कानून को बहाल कर दिया जायेगा. इस तरीके से सुप्रीम कोर्ट द्वारा किये गये प्रावधान रद्द हो जायेंगे. मामले में केस दर्ज होते ही गिरफ्तारी का प्रावधान है. इसके अलावा आरोपी को अग्रिम जमानत भी नहीं मिल सकेगी. आरोपी को हाईकोर्ट से ही नियमित जमानत मिल सकेगी.
मामले में जांच इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अफसर करेंगे. जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल संबंधी शिकायत पर तुरंत मामला दर्ज होगा. एससी-एसटी मामलों की सुनवाई सिर्फ स्पेशल कोर्ट में होगी. सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर करने से पहले जांच एजेंसी को अथॉरिटी से इजाजत नहीं लेनी होगी.

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