पटना : राज्य में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सजेहने के लिए 26 संग्रहालय बनाये गये हैं. इसमें कई संग्रहालय कुछ महान विभूतियों को समर्पित करते हुए उनके जीवन काल और महत्वपूर्ण घटनाओं को चित्रित करते हुए बनाये गये हैं. सभी संग्रहालयों का अपना विशेष महत्व होते हुए भी इनमें आग से सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किये गये हैं.
अगर किसी म्यूजियम में आग लग गयी, तो इस पर तुरंत काबू पाना नामुमकिन होगा. तमाम ऐतिहासिक दस्तावेज या सामग्री आग के हवाले हो जायेगी. कला-संस्कृति विभाग के उच्चाधिकारियों की लापरवाही का नतीजा है कि महीनों से एक्सपायरी होने के बाद भी अग्निशमन सिलेंडर जिन म्यूजियम में मौजूद हैं, वहां वैसे ही रखे हुए हैं. इनकी रिफिलिंग या बदलने पर किसी का ध्यान तक नहीं है. कई म्यूजियम के अध्यक्षों ने इस मामले में कला संस्कृति विभाग को कई पत्र भी लिखा है, लेकिन अब तक इस खतरे को दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर कोई पहल नहीं की गयी है.
पटना में मौजूद संग्रहालय बौद्ध और पाषाण कालीन कई ऐतिहासिक महत्व के समानों के लिए खासतौर से पहचाना जाता है. इतिहास का अध्ययन करने या इसमें रुचि रखने वालों के लिए यह विशेष महत्व का स्थान है.
बावजूद इसके यहां भी आग से सुरक्षा की किसी तरह की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. फायर अलार्म सिस्टम तो है ही नहीं. अग्नि से सुरक्षा के लिए जो अग्निशमन सिलेंडर मौजूद हैं, वह भी महीनों से एक्सपायर पड़े हुए हैं. यानी किसी तरह की आपात स्थिति में ये सिलेंडर काम भी नहीं करेंगे. प्राप्त सूचना के अनुसार यहां के अध्यक्ष ने भी विभाग को कई बार पत्र लिख कर इस स्थिति से अवगत कराते हुए इन सिलेंडर को बदलने या रिफिल कराने का अनुरोध किया है. फिर भी अब तक कोई पहल नहीं की गयी है.
नहीं हैं अग्निशमन यंत्र
वैशाली स्थित चेचर संग्रहालय, पटना स्थित सूरज नारायण सिंह स्मृति संग्रहालय एवं ब्रज बिहारी प्रसाद स्मृति संग्रहालय और मुंगेर संग्रहालय में तो एक भी कर्मी का पद ही नहीं है. ऐसे में इनमें आग से सुरक्षा के लिए किसी तरह के संसाधन के होने की बात सोचना ही बेमानी है.
इसी तरह से राज्य के जननायक कर्पूरी ठाकुर स्मृति संग्रहालय, बक्सर, आरा, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर समेत अन्य स्थानों पर मौजूद कई संग्रहालयों में तो किसी तरह का कोई अग्निशमन यंत्र तक नहीं है. इनमें आग से सुरक्षा का कहीं कोई बंदोबस्त नहीं है.
इस मामले की समीक्षा की जा रही है. संग्रहालयों में अग्निशमन यंत्र होने ही चाहिए, वह भी बिलकुल अपडेट स्थिति में. जहां यंत्र नहीं हैं या खराब स्थिति में हैं, वहां तुरंत इन्हें सुधारवाया जायेगा. इसमें लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की जायेगी.
रवि परमार, प्रधान सचिव, कला-संस्कृति एवं युवा विभाग
