पटना : अब 10 घंटे बाद नहीं दर्ज की जायेगी काउंटर प्राथमिकी

पटना : पटना व नालंदा जिले के थानों में अब पहली प्राथमिकी दर्ज होने के दस घंटे बाद काउंटर प्राथमिकी नहीं की जायेगी. काउंटर प्राथमिकी को दबंगों ने अपना हथियार बना लिया है. इसकी जानकारी लगातार डीआईजी सेंट्रल राजेश कुमार को मिल रही थी. इसके बाद उन्होंने आदेश जारी कर दिया कि पटना व नालंदा […]

पटना : पटना व नालंदा जिले के थानों में अब पहली प्राथमिकी दर्ज होने के दस घंटे बाद काउंटर प्राथमिकी नहीं की जायेगी. काउंटर प्राथमिकी को दबंगों ने अपना हथियार बना लिया है. इसकी जानकारी लगातार डीआईजी सेंट्रल राजेश कुमार को मिल रही थी.
इसके बाद उन्होंने आदेश जारी कर दिया कि पटना व नालंदा जिले के थानों में पहली प्राथमिकी दर्ज होने के दस घंटे बाद काउंटर प्राथमिकी नहीं की जाये. इसका मतलब यह है कि अगर किसी के साथ घटना घटित होती है, तो पीड़ित पक्ष प्राथमिकी के लिए आवेदन देता है. अगर दस घंटे के अंदर दूसरा पक्ष भी आवेदन देता है, तो उस पर काउंटर प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है. लेकिन, दस घंटे के बाद दूसरा पक्ष काउंटर प्राथमिकी कराना चाहेगा, तो थाने में दर्ज नहीं किया जायेगा.
थाने की भूमिका भी रहती है संदिग्ध : आमतौर पर यह देखने में आया है कि किसी के साथ मारपीट की घटना होती है, तो वह थाने में प्राथमिकी दर्ज कराता है. लेकिन, दूसरे पक्ष को जब यह जानकारी होती है कि उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो गयी है, तो वह भी अनाप-शनाप आरोप लगाते हुए काउंटर प्राथमिकी दर्ज करा देता है. दोनों ओर से प्राथमिकी दर्ज हाेने पर सभी कानूनी बंधन में बंध जाते हैं.
अगर पीटने वाले की गिरफ्तारी होगी, तो पिटाने वाले की भी. साथ ही दोनों पक्षों को जमानत लेना होगा. इसके कारण पीटने वाला पक्ष काउंटर प्राथमिकी दर्ज करा कर पिटाने वाले पक्ष पर दबाव बनाता है. एक व्यक्ति जो पहले ही पीटा जा चुका है और काउंटर प्राथमिकी की परंपरा के कारण अब उसे जमानत भी लेनी होगी. इसके कारण पीड़ित खुद ही दबाव में आ जाता है. इसके बाद केस में समझौता तक हो जाता है. साथ ही पुलिसकर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध होती है. वे काउंटर प्राथमिकी दर्ज कराने वालों के ही पक्ष में रहते हैं.
एक अगस्त से ही प्रभावी
इस तरह के मामलों में थानों की भी भूमिका संदिग्ध होती है. काउंटर एफआइआर कराने वालों का असली मकसद खुद को बचाने के साथ ही दूसरे को फंसा कर परेशान करना होता है. इसके कारण पीड़ित को परेशानी होती है. कोई केस दर्ज होता है और अगर पुलिस तुरंत ही मामले की जांच करे, तो यह आसानी से ज्ञात हो सकता है कि उक्त मामले में कौन दोषी है. उसके आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं. साथ ही आरोपित की गिरफ्तारी की जा सकती है. उन्होंने बताया कि एक अगस्त से ही यह आदेश प्रभावी होगा. उन्होंने आदेश की संबंधित पुलिस अधिकारियों को भेज दी है.
– राजेश कुमार, डीआईजी

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