सोन पर छह लेन पुल का इंतजार होगा लंबा, सिर्फ 10% ही काम हुआ पूरा

कोइलवर/पटना : सूबे के अति महत्वपूर्ण पुलों में एक कोइलवर पुल (अब्दुलबारी पुल) के सामांतर बन रहे नये पुल के निर्माण की गति काफी धीमी है. अंग्रेजों के जमाने के कोइलवर पुल के बदहाली और बढ़ते यातायात के समाधान के लिए अलग बननेवाले छह लेन पुल में से एक तरफ (तीन लेन) का निर्माण मार्च, […]

कोइलवर/पटना : सूबे के अति महत्वपूर्ण पुलों में एक कोइलवर पुल (अब्दुलबारी पुल) के सामांतर बन रहे नये पुल के निर्माण की गति काफी धीमी है. अंग्रेजों के जमाने के कोइलवर पुल के बदहाली और बढ़ते यातायात के समाधान के लिए अलग बननेवाले छह लेन पुल में से एक तरफ (तीन लेन) का निर्माण मार्च, 2019 तक करने का निर्देश मुख्य सचिव ने पुल बनानेवाली कंपनी को दिया है. इससे पहले पुल बनाने का लक्ष्य दिसंबर, 2019 तक था. दरअसल पुल निर्माण की धीमी

प्रगति के कारण तय समय पर इसके पूरा होने में संदेह पैदा हो गया था. इस पुल का निर्माण कार्य 26 फरवरी, 2018 को शुरू हुआ. अगले साल दिसंबर
तक काम पूरा कर लेने का दावा है. परंतु यह हास्यास्पद है. इसके बाद अब तक पुल का मात्र 10 फीसदी काम ही हुआ है. विशेषज्ञों की मानें, तो पुल का शेष काम 17 माह में पूरा होना मुश्किल लग रहा है. मतलब साफ है कि काम ऐसे चलता रहा, तो सोन नदी के इस पुल का इंतजार अभी लंबा होगा. आरा को राजधानी से जोड़नेवाला लाइफलाइन कोइलवर पुल के विकल्प में बननेवाले छह लेन सड़क पुल नया विकल्प होगा. इससे पटना-बक्सर रूट में सफर आसान होगा.
छह लेन पुल के लिए 186 करोड़ रुपये होंगे खर्च
जाम की समस्या से लोग परेशान
कोइलवर पुल (अब्दुलबारी पुल) पर जाम की समस्या से लोग परेशान रहते हैं. हर एक दूसरे छोर से आधा घंटा से चालीस मिनट बाद वाहनों को छोड़ा जाता है. इसके लिए पुल के दोनों छोर पर तैनात पुलिस के जवान अंतिम वाहन को कोई सांकेतिक चिह्न देकर छोड़ते हैं, जो दूसरे छोर पर मौजूद पुलिस वाले को वे देते हैं. इसके बाद वहां मौजूद पुलिसवाला गाड़ियों का परिचालन शुरू करवाता है. कोइलवर साइड से पुल के मुहाने पर सड़क के गड्ढे से अक्सर वाहन दुर्घटनाग्रस्त होते हैं. खासकर दोपहिया व तीन पहिया वाहनों की तादाद अधिक होती है. पुल से भींगे बालू वाले वाहनों से निकलनेवाला पानी पुल पर गिरता है. इससे पानी जमा हो जाता है और आने-जाने वालों को परेशानी होती है. पुल में पानी की निकासी के लिए बने छेद बालू वाले ट्रकों से बालू गिरने की वजह से बंद पड़े हैं. गंगा नदी में बबुरा-डोरीगंज के बीच पुल बनने से वाहनों का दबाव अधिक बढ़ा है.

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