पटना : बरसात शुरू होने के साथ ही वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में पर्यटकों की आवाजाही रोक दी गयी है. इसका मूल मकसद वहां के जानवरों खासकर बाघ को ब्रीडिंग (प्रजनन) के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराना है. इसके साथ ही बरसात के दौरान जंगल में पर्यटकों और जानवरों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करना है. इसको लेकर हाल ही में भारत सरकार ने भी एक गाइडलाइन जारी की है.
इसमें वीटीआर के जानवरों की सुरक्षा के लिए वहां विशेष गश्त लगाने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है. पर्यावरण एवं वन विभाग के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने वीटीआर के लिए खास निर्देश जारी किये हैं. इसमें कहा गया है कि मानसून की अवधि वीटीआर के जानवरों खासकर बाघ के प्रजनन के लिए उपयोगी है. इसलिए कम से कम तीन महीने और अधिकतम पांच महीने तक ऐसी व्यवस्था की जाये, जिससे कि इस अवधि में वहां के जानवर शांतिपूर्ण माहौल में रह सकें. इस निर्देश के बाद वीटीआर प्रबंधन ने सितंबर तक वहां पर्यटकों की आवाजाही रोक दी है.
क्या होता है बरसात के मौसम में
वीटीआर के सूत्रों का कहना है कि बरसात शुरू होने के साथ ही टाइगर रिजर्व के जंगलों में गंडक नदी व बारिश का पानी फैल जाता है. जंगल के अंदर पानी भर जाने के कारण जंगली जानवर भी सुरक्षित स्थान की ओर पलायन करते हैं, जो ऊंचे स्थान पर शरण लेते हैं. ऐसे में उन क्षेत्रों में शिकारियों द्वारा उनके शिकार की संभावना बनी रहती है. इसे देखते हुए माॅनसून गश्ती के दौरान कर्मियों की टीम कभी नाव से तो कभी हाथी से गश्ती करती है. वहीं, रात में मुख्य सड़क पर वाहन से गश्ती की जाती है. यह अभियान बरसात समाप्ति के कुछ माह तक चलता रहता है.
