नयी दिल्ली : केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यालय (सीएमओ) को यह बताने का निर्देश दिया है कि क्या यह लोहार समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल करने का इरादा रखता है. यह मामला एक आरटीआइ आवेदक से जुड़ा हुआ है जिन्होंने राज्य की एसटी सूची में लोहार समुदाय को शामिल करने के बिहार सरकार के प्रस्ताव के बारे में ब्योरा जानने के लिए अनुसूचित जनजाति मामलों के मंत्रालय का रुख किया था.
मंत्रालय ने बताया कि प्रस्ताव लंबित है, जिसके बाद आवेदक ने सीआईसी का रुख किया था. सुनवाई के दौरान आयोग को बताया गया कि टिप्पणी और विचार जानने के लिए पिछले साल 17 मार्च को प्रस्ताव रजिस्ट्रार ऑफ इंडिया (आरजीआई) को भेजा गया था. वहीं, आरजीआई ने प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया था. इस बीच, बिहार सरकार ने 23 अगस्त 2016 को यह अधिसूचना जारी की कि लोहार समुदाय को एसटी का प्रमाणपत्र दिया जायेगा. सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने अपने आदेश में जिक्र किया कि उच्चतम न्यायालय ने नवंबर 2006 में कहा था कि केंद्र अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सूची को बढ़ा-घटा नहीं सकता.
आचार्युलु ने इस बात का जिक्र किया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश और संवैधानिक योजना के मुताबिक यह बिहार सरकार का कर्तव्य है कि वह एक रुख अख्तियार करे, प्रक्रिया शुरू करे और इस मुद्दे पर औपचारिक सिफारिश करे कि एससीाएसटी सूची में लोहार समुदाय को शामिल करने में बिहार सरकार की क्या कोई भूमिका है. उन्होंने कहा कि बिहार सरकार को यह बताना है कि लोहार समुदाय के लोग एसटी में आते हैं, या नहीं. उन्होंने कहा कि इस सिलिसले में आयोग ने मुख्यमंत्री कार्यालय, या मुख्य सचिव कार्यालय, या संबद्ध अतिरिक्त सचिव को इस पर अपने रुख की सूचना देने का निर्देश दिया है कि क्या उन्होंने लोहार समुदाय को एसटी में शामिल किये जाने की कोई सिफारिश की है.
