Explainer: TRE-4 में सिंगल एग्जाम से 70वीं BPSC तक, पटना में छात्रों के प्रदर्शन की क्या है वजह?

पटना में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का प्रदर्शन तेज हो गया है.TRE-4 में सिंगल एग्जाम, नेगेटिव मार्किंग, 70वीं BPSC और डोमिसाइल की मांग को लेकर क्या है पूरा विवाद.

पटना में मंगलवार को भर्ती परीक्षाओं को लेकर एक बार फिर छात्रों का प्रदर्शन उग्र हो गया. गांधी मैदान से निकला छात्रों का मार्च मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहा था. लेकिन पुलिस ने डाकबंगला चौराहे के पास उन्हें रोकने की कोशिश की. प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज भी किया. इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर है.

लेकिन सवाल है कि आखिर बिहार के छात्र किस बात को लेकर इतने नाराज हैं? आइए, आसान तरीके से समझते हैं कि TRE-4 में सिंगल एग्जाम से 70वीं BPSC तक पूरा विवाद क्या है.

गांधी मैदान से राजभवन की ओर मार्च के दौरान पुलिस और छात्रों का आमना-सामना

TRE-4 को लेकर क्या है नया विवाद?

आंदोलन का सबसे ताजा विवाद चौथी शिक्षक भर्ती परीक्षा यानी TRE-4 है.

बिहार लोक सेवा आयोग ने 18 अगस्त को इसके लिए 32,388 शिक्षक पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया है. आवेदन प्रक्रिया 1 सितंबर से शुरू होगी और अभ्यर्थी 30 सितंबर तक आवेदन कर सकेंगे. इस भर्ती में कक्षा 1 से 12 तक के स्कूलों के लिए अलग-अलग स्तरों पर शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी.

दो चरणों की परीक्षा पर क्यों अटके छात्र?

TRE-4 में इस बार चयन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है.

  • पहले की शिक्षक भर्ती परीक्षाओं से अलग इस बार प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा, यानी दो चरण रखे गए हैं.
  • प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थी ही मुख्य परीक्षा में जाएंगे. इसके बाद दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया होगी.
  • यही बदलाव छात्रों के विरोध की बड़ी वजह है. अभ्यर्थियों की मांग है कि शिक्षक भर्ती के लिए एक ही परीक्षा कराई जाए. उनका कहना है कि दो चरणों की परीक्षा से चयन प्रक्रिया लंबी होगी और अभ्यर्थियों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव पड़ेगा.
  • दूसरी ओर, आयोग ने दो चरणों वाली व्यवस्था को बरकरार रखा है. ऐसे में छात्रों और आयोग के बीच सबसे बड़ा मतभेद अब इस बात पर है कि शिक्षक भर्ती का चयन एक परीक्षा से हो या दो चरणों में.

नेगेटिव मार्किंग को लेकर क्यों हो रहा इतना विरोध क्यों?

TRE-4 में गलत उत्तर देने पर एक-तिहाई अंक काटने का प्रावधान है. यह नियम छात्रों की नाराजगी की बड़ी वजहों में शामिल है.

  • अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती जैसी परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग हटाई जानी चाहिए, ताकि गलत जवाब के डर से उसका नुकसान न हो.
  • दूसरी ओर आयोग का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में नेगेटिव मार्किंग का मकसद बिना सोचे-समझे जवाब देने की प्रवृत्ति को कम करना है.

दरअसल, छात्रों की आपत्ति सिर्फ एक-तिहाई अंक कटने तक सीमित नहीं है. उनका कहना है कि जब परीक्षा के साथ पहले ही दो चरणों की व्यवस्था और दूसरे बदलाव जुड़े हैं, तब नेगेटिव मार्किंग से परीक्षा और कठिन हो जाती है. यही वजह है कि आंदोलन में एकल परीक्षा और नेगेटिव मार्किंग खत्म करने की मांग प्रमुखता से उठ रही है.


70वीं बीपीएससी परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन करता छात्र

यानी TRE-4 को लेकर विवाद सिर्फ यह नहीं है कि परीक्षा कब और कैसे होगी. असली सवाल यह है कि चयन की पूरी प्रक्रिया अभ्यर्थियों के लिए कितनी आसान, पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए.

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70 वीं BPSC परीक्षा को लेकर क्यों हो रहा है विरोध

आंदोलन का दूसरा बड़ा मुद्दा 70 वीं बीपीएससी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा है.

  • कुछ अभ्यर्थी इस परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
  • हाल में सोशल मीडिया पर एक अभ्यर्थी की कथित उत्तर पुस्तिका को लेकर भी सवाल उठे. दावा किया गया कि कॉपी में अपेक्षाकृत कम सामग्री होने के बावजूद अच्छे अंक दिए गए.
  • हालांकि बीपीएससी ने इन दावों को खारिज करते हुए वायरल उत्तर पुस्तिका को फर्जी बताया और कहा कि उत्तर का मूल्यांकन सिर्फ लिखे गए पन्नों की संख्या देखकर नहीं, बल्कि जवाब की गुणवत्ता और प्रासंगिकता के आधार पर किया जाता है.

70 वीं बीपीएससी को लेकर छात्रों की मांग और आयोग के पक्ष के बीच सबसे बड़ा अंतर है कि अभ्यर्थी परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि आयोग अपनी मूल्यांकन प्रक्रिया को नियमों के मुताबिक बता रहा है.

‘हाथी चले बाजार’ वाली टिप्पणी से भी नाराज है छात्र

  • यह विवाद उस समय और बढ़ गया, जब बीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह की छात्रों के प्रदर्शन के संदर्भ में की गई ‘हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार’ वाली टिप्पणी सामने आई. छात्रों ने इसे अपमानजनक बताया.
  • हालांकि बाद में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई और मामला बढ़ता देख अधिकारी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर माफी मांगी.

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TRE-4 से डोमिसाइल नीति लागू है तो क्या बदलाव चाह रहे हैं छात्र

आंदोलन में डोमिसाइल यानी बिहार के स्थायी निवासियों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की मांग भी की जा रही है.

  • छात्रों का कहना है कि राज्य में निकलने वाली सरकारी भर्तियों में बिहार के युवाओं को ज्यादा अवसर मिलना चाहिए.
  • छात्र शिक्षक भर्ती समेत सरकारी नौकरियों में डोमिसाइल नीति को और मजबूत करने की मांग कर रहे हैं.
  • हालांकि यह मांग नई नहीं है. बिहार सरकार ने पहले TRE-4 से डोमिसाइल नीति लागू करने की बात कही थी. लेकिन मौजूदा TRE-4 की अधिसूचना में सभी पात्र भारतीय नागरिकों को आवेदन का मौका दिया गया है. हालांकि आरक्षण का लाभ बिहार के मूल निवासियों को ही मिलेगा.
  • यहीं से छात्रों की मांग और मौजूदा नियम के बीच अंतर समझ आता है. अभ्यर्थी चाहते हैं कि सिर्फ आरक्षण तक सीमित रहने के बजाय सरकारी शिक्षक भर्ती में बिहार के स्थायी निवासियों को स्पष्ट प्राथमिकता मिले. इसलिए डोमिसाइल का मुद्दा अब परीक्षा के पैटर्न से आगे बढ़कर राज्य की रोजगार नीति से जुड़ गया है.
  • इसको लेकर छात्रों की मांग है कि बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले स्थानीय युवाओं के लिए भर्ती प्रक्रिया में उनकी हिस्सेदारी और प्राथमिकता साफ तौर पर तय हो.

सरकार ने क्या पहल की है?

  • छात्रों की शिकायतें सुनने के लिए सरकार ने ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’, पोर्टल और 1100 हेल्पलाइन शुरू करने की घोषणा की है.
  • सरकार का कहना है कि युवाओं की समस्याओं को सीधे सुना जाएगा और शिकायतों के समाधान की व्यवस्था की जाएगी.

पूरा विवाद किस बात का है?

  • अगर पूरे आंदोलन को एक साथ देखें तो तस्वीर साफ होती है. TRE-4 में छात्र एकल परीक्षा और नेगेटिव मार्किंग खत्म करने की मांग कर रहे हैं.
  • 70वीं बीपीएससी में वे कथित अनियमितताओं की जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग उठा रहे हैं. इसके साथ ही सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और बिहार डोमिसाइल को लेकर भी दबाव बना रहे हैं.
  • पटना की सड़कों पर मंगलवार को हुआ टकराव किसी एक परीक्षा का विवाद नहीं है. यह भर्ती प्रक्रिया पर भरोसे का संकट है.
  • अब सरकार और बीपीएससी के सामने चुनौती यही है कि छात्रों की मांगों पर स्पष्ट जवाब दिया जाए और जहां आरोप हैं, वहां तथ्य सामने रखे जाएं.
  • वहीं अभ्यर्थियों के लिए भी जरूरी है कि वे आरोप और प्रमाण के बीच फर्क रखते हुए अपनी बात आधिकारिक रिकॉर्ड और जांच की मांग के आधार पर आगे बढ़ाएं. पढ़िए देश दुनिया और बिहार झारखंड की ओरिजिनल खबर


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By गौतम कुमार

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