Patna News: पटना विश्वविद्यालय (PU) में छात्रसंघ चुनाव की सरगर्मियों के बीच बुधवार की काली रात गोलियों की गूंज और नारों के शोर में तब्दील हो गई. विभिन्न छात्र संगठनों के बीच कैंपस में अपना दबदबा कायम करने को लेकर हुई हिंसक भिड़ंत ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है.
चुनावी माहौल को बिगड़ता देख पटना पुलिस ने देर रात विश्वविद्यालय के छात्रावासों में छापेमारी की.इस कार्रवाई में मिंटो हॉस्टल से 8 छात्रों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से एक का पुराना आपराधिक इतिहास भी बताया जा रहा है. इस छापेमारी के बाद पूरे कैंपस में भारी पुलिस बल तैनात है और तनावपूर्ण शांति बनी हुई है.
कैंपस में वर्चस्व की जंग और आधी रात का ‘एक्शन’
छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया शुरू होते ही पटना विश्वविद्यालय का मिजाज बदलने लगा है. बुधवार देर रात दो गुटों के बीच शुरू हुई मामूली कहासुनी देखते ही देखते रणक्षेत्र में बदल गई. स्थिति बेकाबू होते देख सिटी एसपी (मध्य) भानु प्रताप सिंह के नेतृत्व में पीरबहोर थाना समेत कई थानों की पुलिस ने एक साथ धावा बोला.
पुलिस की गाड़ियों के सायरन और बूटों की आवाज से पूरा कैंपस गूंज उठा. पुलिस का मुख्य निशाना मिंटो हॉस्टल बना, जहां से उपद्रव की साजिश रचे जाने की गुप्त सूचना मिली थी.
छापेमारी में अपराधी छात्र भी चढ़ा पुलिस के हत्थे
पुलिस की सघन छापेमारी के दौरान मिंटो हॉस्टल के कमरों की बारीकी से तलाशी ली गई. हिरासत में लिए गए 8 छात्रों में से एक छात्र ऐसा है, जो पहले भी कई गंभीर वारदातों में शामिल रहा है. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि बाहरी तत्वों और आपराधिक छवि वाले छात्रों की मौजूदगी चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है.
हिरासत में लिए गए सभी लड़कों से अज्ञात स्थान पर पूछताछ की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कैंपस में हथियार या अन्य आपत्तिजनक सामग्री तो नहीं छिपाई गई है.
भारी सुरक्षा के बीच होगा छात्रसंघ चुनाव
हंगामे के बाद पटना विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है. सिटी एसपी ने स्पष्ट किया है कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह की गुंडागर्दी या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कैंपस के मुख्य द्वारों और छात्रावासों के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है.
विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया जाएगा ताकि छात्र बिना किसी डर के मतदान कर सकें. फिलहाल पुलिस की नजर उन संगठनों पर भी है जो सोशल मीडिया के जरिए तनाव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.
