IGIMS फॉलोअप: आयुष्मान भारत योजना में 5 साल से चल रहा करोड़ों का घोटाला, फिर भी जिम्मेदार जांच से बाहर क्यों?

IGIMS में आयुष्मान भारत योजना के तहत 45 लाख रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है. आउटसोर्सिंग कर्मियों पर रिश्वतखोरी और फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं. मरीजों से अवैध वसूली और सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर क्लेम लेने की बात सामने आई है. मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग उठी है.

Patna News: (आनंद तिवारी की रिपोर्ट) पटना स्थित IGIMS में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना के तहत बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है. शुरुआती जांच में करीब 45 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है. इसके बावजूद अब तक कई जिम्मेदार अधिकारी जांच के दायरे से बाहर बताए जा रहे हैं, जिससे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

जानकारी के अनुसार, आउटसोर्सिंग कंपनी मेहता डाटा मैट्रिक्स के तहत कार्यरत काउंटर क्लर्क अमरजीत राज, चंदन कुमार, साकेत कुमार और अभिषेक कुमार पर रिश्वतखोरी और फर्जीवाड़े के आरोप सामने आए हैं.

इसके अलावा, करीब आठ महीने पहले मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट प्रखंड के बाघाखाल गांव निवासी 46 वर्षीय मनोज झा से आयुष्मान कार्ड पर इलाज का भरोसा देकर 40 हजार रुपये की मांग किए जाने का मामला भी सामने आया था। लगातार शिकायतों के बावजूद कथित मास्टरमाइंड अब तक पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की गिरफ्त से बाहर है।

ऑडिट नहीं होने से बढ़ा फर्जीवाड़ा

सूत्रों और जानकारों के अनुसार, IGIMS प्रशासन की ओर से आयुष्मान भारत योजना के तहत अब तक कोई नियमित ऑडिट नहीं कराया गया. इसी लापरवाही का फायदा उठाकर फर्जीवाड़े का सिलसिला वर्षों तक चलता रहा.

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शिकायत दर्ज नहीं होती तो यह घोटाला सामने भी नहीं आता और फाइलें दबकर रह जातीं. अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर अनियमितताओं के बावजूद जिम्मेदार संस्थागत अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई.

सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर किया गया फर्जीवाड़ा

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपित कर्मियों द्वारा मरीजों से अवैध वसूली की जाती थी और इलाज के दौरान आयुष्मान कार्ड को सॉफ्टवेयर में फर्जी तरीके से अपलोड कर क्लेम पास कराया जाता था.

संस्थान के उच्च अधिकारियों ने इन मामलों की रिपोर्ट तैयार कर जिला एवं राज्य स्तर के आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारियों को भेज दी है। फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच जारी है.

बड़े रैकेट की आशंका, उच्च स्तरीय जांच की मांग

अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क या रैकेट की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा सकता. ऐसे में पूरे सिस्टम की उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है.

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Published by: Nikhil Anurag

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