पटना नगर निगम के आरोपी कर्मचारी के निलंबन को लेकर बवाल, मेयर और नगर आयुक्त आमने-सामने, जानें पूरा मामला

कंकड़बाग अंचल में अतिक्रमण हटाओ अभियान के प्रभारी रहे मिथिलेश शर्मा पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने अतिक्रमण पर कार्रवाई नहीं करने के एवज में 10 से 15 हजार रुपये की मांग की. बाद में शिकायतों को देखते हुए मिथिलेश शर्मा को अतिक्रमण हटाओ अभियान के प्रभार से हटा दिया गया.

पटना नगर निगम बोर्ड की बैठक बुधवार को सिर्फ 45 मिनट में ही खत्म हो गयी. बैठक में अलग-अलग एजेंडों पर चर्चा होनी थी, लेकिन कंकड़बाग अंचल के अतिक्रमण हटाओ अभियान के पूर्व प्रभारी मिथिलेश शर्मा के निलंबन का मुद्दा बहस का विषय बन गया. रिश्वत मांगने के आरोपित मिथिलेश शर्मा को निलंबित करने की मांग मेयर व सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों ने की, जिसे नगर आयुक्त ने ठुकरा दिया और जांच पूरी होने का इंतजार करने करने की बात कही. इससे गरमागरम बहस होने लगी, जिसके बाद बैठक को खत्म करनी पड़ी.

मेयर और नगर आयुक्त आमने-सामने

दरअसल, तीन मार्च को पटना नगर निगम के बोर्ड की बैठक हुई थी, जिसमें मिथिलेश शर्मा को निलंबित करने का प्रस्ताव पारित हुआ था. लेकिन, मिथिलेश शर्मा को नगर आयुक्त अनिमेष कुमार पराशर ने निलंबित नहीं किया. बुधवार को तकरीबन एक बजे सशक्त स्थायी समिति के सदस्य इंद्रदीप चंद्रवंशी और आशीष सिन्हा ने मिथिलेश शर्मा के निलंबन का मुद्दा उठाया. देखते-ही-देखते कुछ और पार्षद भी इस मांग के साथ खड़े हो गये. कुछ देर में मेयर सीता साहू ने भी इस मांग का समर्थन किया. लेकिन निगम आयुक्त अनिमेष कुमार पराशर ने आरोपित कर्मचारी के निलंबन से इन्कार कर दिया. उन्होंने कहा कि किसी भी आरोपित को यों ही निलंबित नहीं किया जा सकता है. फिलहाल मिथिलेश शर्मा के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है और अगर जांच में ठोस सबूत मिलता है, तो फौरन निलंबित किया जायेगा. हालांकि, अनिमेष कुमार पराशर की अपील को स्टैंडिंग कमेटी के सदस्यों ने एक सुर से ठुकरा दिया और दोपहर 1:30 बजे निगम बोर्ड की कार्रवाई स्थगित कर दी गयी

क्या है मिथिलेश शर्मा का मामला?

पटना नगर निगम की कंकड़बाग अंचल में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई चल रही थी. कंकड़बाग अंचल में अतिक्रमण हटाओ अभियान के प्रभारी के रूप में मिथिलेश शर्मा की तैनाती हुई थी. उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने कार्रवाई नहीं करने के एवज में 10 से 15 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं. बाद में शिकायतों को देखते हुए मिथिलेश शर्मा को अतिक्रमण हटाओ अभियान के प्रभार से हटा दिया गया.

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किसने क्या कहा?

  • किसी भी आरोपी को हटाने का एक नियम होता है. हम याें ही किसी को पद से नहीं हटा सकते हैं. अगर आरोपित मिथिलेश शर्मा को निलंबित कर दिया जाये और अगर उसे कोर्ट से राहत मिल जाती है, तो इसमें निगम की ही फजीहत होगी. – अनिमेष कुमार पराशर,निगम आयुक्त, पटना नगर निगम

  • निगम बोर्ड नगर निगम की सर्वोच्च इकाई है. इसकी गरिमा होती है. मिथिलेश शर्मा को सर्वसम्मति से निलंबन का प्रस्ताव तीन मार्च को पारित हुआ था. तीन महीने हो गये, लेकिन उन्हें सिर्फ मौजूदा काम से हटाया गया है. क्या निगम बोर्ड की कोई गरिमा नहीं है? -आशीष कुमार सिन्हा, सदस्य, सशक्त स्थायी समिति

  • सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों ने सही मांग की है. जिनके खिलाफ आरोप है, उन पर कार्रवाई होनी ही चाहिए. निगम आयुक्त यों ही किसी को राहत नहीं दे सकते हैं. उनकी मर्जी जब होगी, तब वह बगैर किसी का पक्ष सुने ही पद से हटा देंगे. आयुक्त को बात माननी पड़ेगी. -सीता साहू,मेयर, पटना नगर निगम

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