रेतुआ नदी की धारा में समाये काशर टोला गांव के डेढ़ दर्जन घर, बांध पर लोगों ने जमाया डेरा

बहादुरगंज : कौल-कनकई नदी का उफान तो थमा नहीं कि रेतुवा नदी की तेज धार अब बहादुरगंज के पश्चिमी सीमा पर स्थित दुर्गापुर बनगामा पंचायत के कासरटोला गांव के लिए कहर साबित होने लगी है.

बहादुरगंज : कौल-कनकई नदी का उफान तो थमा नहीं कि रेतुवा नदी की तेज धार अब बहादुरगंज के पश्चिमी सीमा पर स्थित दुर्गापुर बनगामा पंचायत के कासरटोला गांव के लिए कहर साबित होने लगी है. तेज धार व कटाव का हाल यह है कि अब तक डेढ़ दर्जन से ज्यादा परिवारों के आशियाने नदी में समा चुका है.

कटाव से विस्थापित परिवार गांव के समीप बांध पर अस्थायी रूप से डेरा डाले हुए हैं एवं अपनी किस्मत का रोना रो रहे हैं. परन्तु विस्थापित परिवारों की अबतक किसी ने सुधि तक नहीं ली है. कटाव स्थल से जिला पार्षद प्रतिनिधि इमरान आलम ने जानकारी देते हुए बताया कि हालांकि मामले की जानकारी से स्थानीय प्रशासन व जल निस्सरण विभाग को अवगत करवाया जा चुका है. बाबजूद इसके कटाव से बचाव की बात तो दूर विस्थापित परिवारों को किसी तरह की तत्काल सरकारी मदद भी नहीं दी जा सकी है.

कटाव से पीड़ित परिवारों की मनोदशा के बीच अब जिला प्रशासन को भी वस्तुस्थिति से अवगत करवाया जा चुका है. जहाँ पीड़ितों के हित को ध्यान में रखते हुए यथोचित प्रशासनिक पहल सुनिश्चित किये जाने का आश्वासन भी मिला है. पंचायत के मुखिया गयानंद मंडल ने बताया कि इससे पहले भी वर्ष 2018 में रेतुवा के कटाव से गांव के दर्जनों परिवारों का घर नदी में विलीन हो चुके हैं एवं संबंधित लोग किसी दूसरे सुरक्षित जगहों पर अपना आशियाना खड़ी कर जीवन बसर कर रहे हैं.

बाबजूद इसके शासन-प्रशासन में बैठे लोगों ने ग्रामीणों की दर्द व पीड़ा व भविष्य की आशंका को जानने की कोशिश नहीं की. परिणाम सामने है कि फिर नदी का उफान यहां कहर बनकर खड़ी है एवं आंखों के सामने ही बारी-बारी से उनके आशियाने नदी में समाये जा रहे हैं. उधर ग्रामीणों को आशंका है कि समय रहते ही बचाव की दिशा में ठोस प्रशासनिक पहल सुनिश्चित नहीं हो सकी तो गांव के भविष्य पर संकट की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता है.

posted by ashish jha

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