NEET Student Death Case: अदालत ने सीबीआई को 30 मार्च 2026 तक इस केस की प्रोग्रेस रिपोर्ट दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया था. तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी सीबीआई रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी और एजेंसी ने जांच की जटिलताओं का हवाला देते हुए अदालत से और अतिरिक्त समय की मांग की है.
अदालत ने सीबीआई की इस गुजारिश को स्वीकार तो कर लिया है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद जताई है.
जांच की सुस्त रफ्तार पर अदालत की सख्ती
सोमवार को पॉस्को एक्ट के विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमन की अदालत में सीबीआई के अधिकारी और वकील पेश हुए.अदालत ने सीबीआई को 30 मार्च 2026 तक इस केस की स्थिति और प्रोग्रेस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था.
तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी सीबीआई रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी और एजेंसी ने जांच की जटिलताओं का हवाला देते हुए अदालत से और अतिरिक्त समय की मांग की है.
हॉस्टल मालिक की अर्जी
इस हाई-प्रोफाइल मामले में जेल की सलाखों के पीछे बंद गर्ल्स हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया है.
हॉस्टल परिसर सील होने के कारण उनके परिवार को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. विशेष अदालत ने इस मानवीय आधार पर दी गई अर्जी को संज्ञान में लेते हुए सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह इस आवेदन पर अपना जवाब दाखिल करे. अब गेंद सीबीआई के पाले में है कि वह सुरक्षा और साक्ष्यों के मद्देनजर इस आवास को खोलने के पक्ष में है या नहीं.
पीड़ित परिवार की न्याय के लिए गुहार
इस मामले में शिकायतकर्ता ने 25 मार्च 2026 को अदालत में एक आवेदन देकर सीबीआई जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे. सीबीआई को अदालत के समक्ष यह स्पष्ट करना चाहिए कि अब तक के जांच-पड़ताल में क्या तथ्य निकलकर सामने आए हैं.
इसी आवेदन पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी थी. मुन्नाचक जैसे व्यस्त इलाके के एक हॉस्टल में छात्रा की जान जाना और फिर जांच का सीबीआई तक पहुंचना, इस बात का संकेत है कि मामला कितना संवेदनशील है. छात्रा के माता-पिता और शुभचिंतक बेसब्री से उस रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं जो यह बताएगी कि उस काली रात आखिर हुआ क्या था?
प्राइवेसी और साक्ष्यों के बीच फंसी जांच
सीबीआई के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. एक तरफ अभियुक्त के परिवार के रराइट टू रेजिडेंस की रक्षा का सवाल है, तो दूसरी तरफ हॉस्टल के उन कमरों में छिपे साक्ष्य हैं जो केस को सुलझाने की चाबी हो सकते हैं. अगर हॉस्टल का सील हिस्सा खोला जाता है, तो क्या सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गुंजाइश बनेगी?
नीट छात्रा की मौत का यह मामला शुरुआत से ही संवेदनशील बना हुआ है. ऐसे में सीबीआई जांच की धीमी रफ्तार और रिपोर्ट में देरी से लोगों की चिंता और बढ़ गई है.
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