बिहार कांग्रेस में ब्राह्मण और यादवों को सौंपी 53 जिलों की कमान,पुराने समीकरण की ओर लौटी पार्टी

Bihar Congress: बिहार कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए सभी 53 संगठनात्मक जिलों में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है. इस नई सूची में पार्टी का पारंपरिक जातीय समीकरण साफ झलकता है, जहां ब्राह्मण और यादव नेताओं को सबसे ज्यादा तरजीह दी गई है.

Bihar Congress: बिहार की राजनीति में कांग्रेस ने 53 जिलाध्यक्षों की फौज उतारकर पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह अपने पुराने गौरव को पाने के लिए सामाजिक संतुलन का सहारा ले रही है.

राज्य के सभी 53 संगठनात्मक जिलों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है. इस नई लिस्ट में पार्टी का पुराना और पारंपरिक ‘सोशल इंजीनियरिंग’ फॉर्मूला साफ झलक रहा है.

ब्राह्मण-यादव को सबसे ज्यादा जिम्मेदारी

नई नियुक्तियों में ब्राह्मण और यादव जाति के नेताओं को 10-10 जिलों की कमान सौंपी गई है. इसके बाद मुसलमान, दलित और भूमिहार समुदाय के नेताओं को 7-7 जिलों की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं राजपूत नेताओं को 5 जिलों का नेतृत्व मिला है. इस तरह कुल 53 में से 38 जिलों की कमान सवर्ण, दलित और मुसलमान नेताओं के हाथ में गई है.

पार्टी ने एक बार फिर जातीय संतुलन साधने की कोशिश की है, ताकि सभी प्रमुख सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व मिल सके और संगठनात्मक पकड़ मजबूत हो.

पटना में सवर्ण नेताओं को तरजीह

पटना की संगठनात्मक राजनीति में कांग्रेस ने सवर्ण चेहरों को आगे रखकर अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है. पटना ग्रामीण-1 की कमान चंदन कुमार को मिली है जो भूमिहार समाज से आते हैं, जबकि पटना ग्रामीण-2 की जिम्मेदारी सिख समुदाय के गुरजीत सिंह को सौंपी गई है.

पटना शहरी के जिलाध्यक्ष के रूप में कायस्थ बिरादरी के कुमार आशीष को नियुक्त किया गया है. पार्टी का मानना है कि शहरी इलाकों में इस समीकरण के जरिए वह मध्यम वर्ग और प्रबुद्ध समाज के बीच अपनी पैठ फिर से मजबूत कर पाएगी.

पुराने किलों को बचाने के लिए नए सेनापति

कांग्रेस ने केवल जाति ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय प्रभाव को भी ध्यान में रखा है. मुस्लिम नेताओं को 7 और दलित समुदाय को भी 7 जिलों की कमान देकर पार्टी ने समावेशी राजनीति का संदेश दिया है. भूमिहार नेताओं को 7 और राजपूत समाज के नेताओं को 5 जिलों का नेतृत्व मिला है.

अररिया में मो. मासूम रजा, औरंगाबाद में आनंद शंकर सिंह और भागलपुर में प्रवीण सिंह कुशवाहा जैसे चेहरों के जरिए पार्टी ने स्थानीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है. जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाकर कांग्रेस अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, ताकि विपक्ष को कड़ी टक्कर दी जा सके.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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