Bihar: बिहार के स्कूलों में अब पढ़ाई के साथ-साथ प्रबंधन व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव होने जा रहा है. शिक्षा मंत्रालय की नई गाइडलाइन के बाद राज्य के सभी स्कूलों में नई स्कूल मैनेजमेंट कमिटी का गठन किया जायेगा. इस नई व्यवस्था में अभिभावकों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगी. स्कूलों को कई अहम फैसले लेने से पहले अब माता-पिता की राय और अनुमति लेनी होगी. इसका सीधा असर निजी और सरकारी दोनों तरह के स्कूलों पर पड़ेगा. शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी खास दुकान, विक्रेता या ब्रांड से किताब, कॉपी, पठन-पाठन सामग्री या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेगा.
अभिभावक पर दबाव नहीं डाल पाएंगे
अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के हिसाब से कहीं से भी किताबें, ड्रेस और जरूरी सामान खरीद सकेंगे. स्कूलों को केवल यूनिफॉर्म का पैटर्न और जरूरी जानकारी अपने सूचना-पट्ट और वेबसाइट पर देनी होगी. बार-बार किताब या ड्रेस का पैटर्न बदलने पर भी रोक रहेगी. अगर किसी वजह से बदलाव जरूरी हुआ तो इसके लिए शिक्षक-अभिभावक संघ की सहमति लेनी होगी.
नई गाइडलाइन के मुताबिक स्कूल अब छात्रों या अभिभावकों पर तय पाठ्यक्रम से बाहर की अतिरिक्त किताबें या सामग्री खरीदने का अनावश्यक दबाव नहीं डाल सकेंगे. कई अभिभावकों की शिकायत थी कि निजी स्कूल गैरजरूरी किताबें और महंगी सामग्री खरीदने के लिए दबाव बनाते हैं. अब ऐसी शिकायतों पर सख्ती होगी.
निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था पर भी कड़ा नियंत्रण
शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों को चेतावनी दी है कि फीस बढ़ोतरी मनमाने ढंग से नहीं की जा सकेगी. अगर फीस बढ़ाना जरूरी होगा तो तय नियमों और प्रक्रिया के तहत ही किया जायेगा. पुनर्नामांकन शुल्क यानी री-एडमिशन फीस और दूसरे प्रतिबंधित शुल्क वसूलने पर रोक रहेगी. विभाग ने स्पष्ट कहा है कि छात्रों की पढ़ाई बिना आर्थिक दबाव के जारी रहनी चाहिए.
अब सभी निजी स्कूलों को फीस, किताब, यूनिफॉर्म और अन्य जरूरी शुल्क से जुड़ी पूरी जानकारी स्कूल के नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी. इससे अभिभावकों को पहले से पूरी जानकारी मिल सकेगी और छिपे हुए शुल्क या मनमानी पर रोक लगेगी.
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अभिभावकों को मिलेगा सीधा अधिकार
नई स्कूल मैनेजमेंट कमिटी का सबसे बड़ा उद्देश्य स्कूल प्रबंधन में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाना है. सरकार चाहती है कि बच्चों की पढ़ाई से जुड़े फैसलों में परिवार की सीधी भूमिका हो, ताकि स्कूलों की जवाबदेही बढ़े और शिक्षा व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी बने.
शिक्षा विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई निजी स्कूल फीस, किताब और ड्रेस के नाम पर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं. इसी को देखते हुए यह नई व्यवस्था लागू की जा रही है. सरकार का मानना है कि इससे स्कूलों की मनमानी रुकेगी, अभिभावकों को राहत मिलेगी और बच्चों की पढ़ाई अधिक व्यवस्थित व पारदर्शी माहौल में हो सकेगी.
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