तिलैया नदी के अस्तित्व पर खतरा, संरक्षण की जरूरत

Nawada news : आधा दर्जन प्रखंडों से गुजरी नदी हो रही मैली, पशु के पीने लायक भी नहीं है पानी

फोटो गंदगी से पटी तिलैया नदी.

प्रतिनिधि, मेसकौर

आधा दर्जन प्रखंडो से गुजरने वाली तिलैया नदी हर रोज मैली हो रही है. खुद के अस्तित्व को गांव व शहर के कचरा, मैला व अन्य केमिकल्स से मिटाते हुए जनजीवन को स्वच्छता प्रदान कर रही. इन नदियों के अतीत को सहेजने की दिशा में कोई कारगर पहल नहीं की जा रही है. स्थिति यह है कि आधा दर्जन प्रखंडों के मध्य से गुजरने वाली तिलैया नदी में शहरी व देहाती गंदे नाले समाहित हो रहे हैं. इससे ये नदी हर रोज मैली हो रही है. लेकिन, सरकारी महकमा को इससे कोई सरोकार नहीं है. बता दें कि रामायण काल की तमसा नदी, जो की अब तिलैया नदी के नाम से जानी जा रही है. ये नदी अपना अस्तित्व खोते जा रही है. बताते चले कि प्राय: नाली के पानी में शौचालय के आउटलेट, नहाने का साबुन व शैंपू के भी केमिकल्स रहते है. इसके कारण इसमें मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है. इस पानी में मिथेन, सल्फर, एसिड, कार्बन मोनो आक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड पाये जाते हैं. इसका कुप्रभाव वायु, मिट्टी पर भी पड़ता है. नदियों के मछलियों व आदमी व पशुओं को नुकसान पहुंचता है. तिलैया नदी के स्वच्छ पानी का उपयोग पहले वाशरुम फ्लस व कपड़ा धोने, पशु पक्षियों को पिने सहित पानी का उपयोग रोड स्वीपिंग और वाहन धोने में होता है. लेकिन इसका उपयोग अब न तो पिने में हो रहा है और न ही अन्य कार्यों में हो रहा है. तिलैया नदी को कभी जीवन दायिनी नदी कहा जाता था, जिसका पानी कभी पीने योग्य था. आज उसके अस्तिव पर खतरा मंडरा रहा है. वैसे तो सरकार ने तिलैया नदी सहित अन्य नदी को पुनर्जीवित करने के लिए अभियान चलाकर लाखों रुपये खर्च भी किये, लेकिन सरकार के इन प्रयासों का असर जमीन पर नहीं दिख रहा है.

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By Prabhat Khabar News Desk

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