पांच साल में ही धमनी-सवैयाटांड़ ग्रामीण पथ की पुलिया व सड़क धराशायी

Nawada news. प्रखंड क्षेत्र के धमनी और सवैयाटांड़ पंचायतों को जोड़ने वाला एकमात्र धमनी-सवैयाटांड़ ग्रामीण पथ व एक महत्वपूर्ण पुलिया भारी बारिश में सड़क के साथ ही बह गयी है.

80 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाने को मजबूर हुए ग्रामीण

फोटो-टूटी पुलिया व बही सड़क के समीप जुटे लोग. प्रतिनिधि, रजौली प्रखंड क्षेत्र के धमनी और सवैयाटांड़ पंचायतों को जोड़ने वाला एकमात्र धमनी-सवैयाटांड़ ग्रामीण पथ व एक महत्वपूर्ण पुलिया भारी बारिश में सड़क के साथ ही बह गयी है. चौंकाने वाली बात यह है कि यह पुलिया सिर्फ पांच साल पहले ही बनकर तैयार हुई थी, जिसने निर्माण कार्य में बरती गयी कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. इस घटना ने हजारों ग्रामीणों की जिंदगी को मुश्किल में डाल दिया है, क्योंकि अब उन्हें प्रखंड मुख्यालय पहुंचने के लिए 13 किलोमीटर की जगह 80 किलोमीटर का लंबा और थकाऊ सफर तय करना पड़ेगा.

संवेदक पर मनमानी और भ्रष्टाचार का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क और पुलिया का निर्माण करने वाले संवेदक अंगद कुमार सिन्हा ने अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती है. धमनी पंचायत के पूर्व मुखिया धीरज कुमार, पूर्व पंचायत समिति सिकंदर राजवंशी, रंजीत पंडित, पूर्व उपमुखिया दीपक कुमार, पैक्स अध्यक्ष विनय कुमार, शिवनंदन राजवंशी सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि 12.650 किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण कार्य वर्ष 2018 के अंत में शुरू होकर वर्ष 2019 के अंत में समाप्त हो गया था. इसके लिए 609.758 लाख रुपये की अनुमानित राशि और पांच वर्षीय अनुरक्षण के लिए 44.48 लाख रुपये की लागत तय की गयी थी. ग्रामीणों का आरोप है कि घटिया सामग्री के इस्तेमाल और निर्माण मानकों की अनदेखी के कारण ही पुलिया इतनी जल्दी टूट गयी. उन्होंने सड़क निर्माण और उसके बाद के अनुरक्षण कार्य की गहन जांच की मांग की है, ताकि भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों पर कार्रवाई हो सके.

सवैयाटांड़ के ग्रामीणों के लिए बढ़ीं दुश्वारियां

मुख्यालय पहुंचने को 67 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर पुलिया के टूटने का सबसे बड़ा खामियाजा सुदूरवर्ती सवैयाटांड़ पंचायत के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है. पहले उन्हें प्रखंड, अंचल, अनुमंडल कार्यालयों, अनुमंडलीय अस्पताल और थाना जैसे आवश्यक स्थानों तक पहुंचने के लिए इस पथ से केवल 13 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी. अब मंदिर के पास पुलिया और सड़क का हिस्सा बह जाने के कारण, उन्हें नीरू पहाड़ी होते हुए कोडरमा घाटी के रास्ते रजौली पहुंचने के लिए 80 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी. यह उनके लिए 67 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर है, जो न सिर्फ समय बर्बाद कर रहा है, बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ा रहा है. ग्रामीण इस आकस्मिक संकट से काफी चिंतित हैं और जल्द से जल्द पुलिया के निर्माण की गुहार लगा रहे हैं.

अधिकारी का लीपापोती भरा बयान और त्वरित कार्रवाई का आश्वासन

इस मामले पर ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता अरविंद कुमार ने एक विचित्र बयान देते हुए कहा कि उन्हें भारी बारिश के कारण धमनी-सवैयाटांड़ ग्रामीण पथ में सड़क का एक टुकड़ा बह जाने की सूचना है, किंतु पुलिया के टूटने की सूचना नहीं है. हालांकि, उन्होंने तुरंत कनीय अभियंता को स्थल का भौतिक निरीक्षण करने का आदेश दिया है और आश्वासन दिया है कि जल्द ही पुलिया का निर्माण करवाया जायेगा, ताकि ग्रामीणों को आवागमन में हो रही असुविधा दूर हो सके. गौरतलब है कि यह घटना सिर्फ एक पुलिया का टूटना नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का एक जीता-जागता उदाहरण है,जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है.

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Published by: Kr manish dev

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