Nawada News : रजौली प्रखंड ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के नियोजित, विशिष्ट, प्रधान शिक्षक और विद्यालय अध्यापक विभिन्न समस्याओं के बीच अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं. शिक्षकों का कहना है कि 23 वर्षों की सेवा के बाद भी प्रोन्नति, वेतन भुगतान और स्थानांतरण जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है. इन समस्याओं के कारण शिक्षकों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाने तक की नौबत आ रही है.
उच्च न्यायालय के न्यायादेश CWJC 1673/2025 और शिक्षा सचिव के निर्देशानुसार जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, स्थापना, नवादा के ज्ञापांक 1023 दिनांक 17 फरवरी 2026 के आलोक में रजौली प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने पत्रांक 143 दिनांक 12 मार्च 2026 को प्रोन्नति के लिए प्रथम सूची समर्पित की थी. इसके बावजूद शिक्षक अब तक प्रोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं.
सहयोग पोर्टल पर शिकायत के बाद भी नहीं मिला समाधान
एक शिक्षक चंदन कुमार, प्राथमिक विद्यालय डगरा स्थान को अधिशेष शिक्षक बनाकर स्थानांतरण के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया गया. मजबूरी में उन्होंने स्थानांतरण के लिए आवेदन किया और अपनी समस्या को सहयोग पोर्टल पर भी दर्ज कराया. शिक्षकों के अनुसार, 30 दिन बीत जाने के बाद भी प्रोन्नति नहीं दी गयी और मामला दोबारा प्राथमिक निदेशक से मार्गदर्शन मांगने के लिए भेज दिया गया. इससे असंतुष्ट होकर शिक्षक ने मुख्यमंत्री के सहयोग पोर्टल पर पुनः शिकायत दर्ज करायी है.
शिक्षकों का आरोप है कि कई विद्यालयों में वरीयता का निर्धारण विभागीय पत्र के अनुसार नहीं किया गया है. उनका कहना है कि प्रधान शिक्षक और प्रधानाध्यापकों द्वारा मनमाने तरीके से वरीयता सूची तैयार की गयी है.
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तीन माह से वेतन नहीं, एक शिक्षक की सेवा भी समाप्त
शिक्षकों का कहना है कि नियोजित शिक्षक विद्यालय व्यवस्था की मूल कड़ी हैं, लेकिन किसी कारणवश विशिष्ट शिक्षक नहीं बन पाने वाले कई शिक्षकों को पिछले तीन माह से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है. रजौली प्रखंड के शिक्षक प्रहलाद कुमार चौधरी सत्र 2017-19 में मात्र एक विषय में अनुत्तीर्ण हुए थे. कोरोना काल के कारण दोबारा परीक्षा के लिए विज्ञप्ति नहीं निकलने से वह परीक्षा के लिए आवेदन नहीं कर सके. इसके बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गयी. शिक्षकों के अनुसार, आज तक उनका बकाया वेतन भी नहीं मिला है.
जरूरतमंद शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं होने का आरोप
शिक्षकों का कहना है कि जिन्हें वास्तव में स्थानांतरण की जरूरत है, उनका स्थानांतरण नहीं किया जा रहा है. वहीं, जिन विद्यालयों में शिक्षकों की आवश्यकता है, वहां से भी शिक्षकों को अधिशेष घोषित कर दूसरे प्रखंड में भेजने की प्रक्रिया अपनायी जा रही है. इससे शिक्षकों के साथ-साथ विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित होने की आशंका है.
समस्याओं के समाधान के बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुश्किल
शिक्षक नेता अजित कुमार ने कहा कि यदि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का माहौल बनाने में शिक्षक स्वयं को असहज महसूस करेंगे. शिक्षकों ने मांग की है कि प्रोन्नति, वेतन भुगतान और स्थानांतरण से जुड़ी समस्याओं का अविलंब समाधान किया जाए, ताकि वे बिना किसी दबाव के विद्यालयों में बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकें.
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