रजौली में प्रधान शिक्षकों को मिला टैब, अब बच्चे नहीं होंगे स्कूल से गायब

NAWADA NEWS.रजौली प्रखंड में अब स्कूली शिक्षा एक नये युग में प्रवेश कर रही है. सोमवार को प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सह प्रखंड कल्याण पदाधिकारी राकेश कुमार रजौली ने संकुल स्तरीय स्कूलों के प्रधान शिक्षकों को दो-दो टैब वितरित किये.

डिजिटल निगरानी से सुधरेगी हाजिरी और शिक्षा की गुणवत्ता

प्रखंड के 158 विद्यालयों में देने के लिए 318 टैब विभाग ने कराया है उपलब्ध

प्रतिनिधि, रजौली

रजौली प्रखंड में अब स्कूली शिक्षा एक नये युग में प्रवेश कर रही है. सोमवार को प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सह प्रखंड कल्याण पदाधिकारी राकेश कुमार रजौली ने संकुल स्तरीय स्कूलों के प्रधान शिक्षकों को दो-दो टैब वितरित किये. इस कदम का उद्देश्य बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करना और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है. रजौली में कुल सत्रह संकुल संचालित हैं, उन्होंने बताया कि प्रखंड क्षेत्र के 158 विद्यालयों में देने के लिए 318 टैब विभाग ने उपलब्ध कराया है. सभी स्कूलों को पंचायतवार तरीके से संकुलों में समायोजन करके वितरण किया जा रहा है, कुल 17 संकुलों से संबंध स्कूलों में टैब दिया जाना है. प्रत्येक विद्यालयों में डिजिटल हाजिरी और अन्य शैक्षिक कार्यों के लिए दो अत्याधुनिक डिवाइस मिलेंगे. अब तक 8 संकुलों से संबंध विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को टैब दिया गया है.

अब बच्चों की बनेगी डिजिटल हाजिरी

सोमवार दोपहर बीआरसी भवन में आयोजित एक समारोह में टैब वितरण करते हुए राकेश कुमार ने बताया कि टैब का प्राथमिक उद्देश्य बच्चों की उपस्थिति को प्रभावी और सटीक तरीके से दर्ज करना है. उन्होंने जोर देकर कहा, अब टैब के जरिए हाजिरी बनेगी, जिससे बच्चे स्कूलों से अनुपस्थित नहीं हो पायेंगे और उनकी नियमित उपस्थिति बनी रहेगी. यह पहल सरकारी स्कूलों में नामांकन के बाद बच्चों के लगातार अनुपस्थित रहने की पुरानी और गंभीर समस्या से निपटने में मील का पत्थर साबित होगा. शिक्षकों को अब मैन्युअल रजिस्टर भरने की बजाय सीधे टैब पर छात्रों की दैनिक उपस्थिति दर्ज करनी होगी, जिससे समय की बचत होगी और डेटा में त्रुटियों की संभावना भी कम होगी.

डेटा-आधारित निर्णय और शिक्षा में पारदर्शिता

इस डिजिटल पहल के दूरगामी परिणाम होंगे. यह न केवल बच्चों की उपस्थिति की निगरानी को अभूतपूर्व तरीके से बेहतर बनायेगा, बल्कि शिक्षा विभाग को बच्चों की स्कूल में उपस्थिति, उनकी शैक्षिक प्रगति और यहां तक कि मध्याह्न भोजन योजना के कार्यान्वयन पर भी सटीक और वास्तविक समय का डेटा उपलब्ध करायेगा. यह डेटा भविष्य की शैक्षिक नीतियों, हस्तक्षेपों और संसाधनों के बेहतर आवंटन के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा. डेटा के आधार पर स्कूलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना भी आसान होगा, जिससे जवाबदेही बढ़ेगी और शिक्षा प्रणाली में अधिक पारदर्शिता आएगी.

शिक्षकों के प्रशासनिक कार्यभार में मिलेगी सहूलियत

प्रधान शिक्षकों ने इस कदम का स्वागत किया है.उनका मानना है कि यह टैब उनके प्रशासनिक कार्यभार को कम करेगा, जिससे वे अपना अधिक समय छात्रों की पढ़ाई और उनके सर्वांगीण विकास पर केंद्रित कर पायेंगे. एक प्रधान शिक्षक ने बताया, यह टैब हमारी बहुत मदद करेगा. अब हमें रजिस्टर में हाजिरी भरने और फिर उसकी रिपोर्ट भेजने में लगने वाले समय की बचत होगी. हम बच्चों को पढ़ाने और उनकी समस्याओं को समझने में अधिक समय दे पायेंगे. दूसरे शिक्षक ने कहा कि वे इन टैब का उपयोग विभिन्न शैक्षिक ऐप और इ-कंटेंट को एक्सेस करने के लिए भी कर सकते हैं, जिससे कक्षा शिक्षण अधिक इंटरैक्टिव और आकर्षक बनेगा.

राज्य सरकार की डिजिटल इंडिया पहल का हिस्सा

यह पहल बिहार सरकार के व्यापक डिजिटल इंडिया अभियान और शिक्षा क्षेत्र में तकनीकी एकीकरण के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है. राज्य सरकार शिक्षा को आधुनिक बनाने और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है. इन टैबों के माध्यम से, रजौली के दूरदराज के इलाकों में भी छात्रों को आधुनिक शिक्षा से जुड़ने का अवसर मिलेगा और वे डिजिटल युग की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सकेंगे. उम्मीद है कि इस तकनीक का उपयोग रजौली प्रखंड में शिक्षा की गुणवत्ता को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर ले जायेगा और बच्चों को नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित करेगा.

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Published by: Kr manish dev

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