शब-ए-बरात 13 फरवरी को, अल्लाह की इबादत करें और आतिशबाजी से परहेज करें : महजूरुल क़ादरी

पटाखे के रुपये को गरीबों में दान कर दें.

नवादा कार्यालय. तंजीम उलामा-ए-हक़ के जिलाध्यक्ष मौलाना मो जहांगीर आलम महजूरूल क़ादरी ने अपने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जिला के मुसलमानों से अपील की है कि शब-ए-बरात का इस्लाम धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है. यह रात गुनाहों से माफी की रात है. इस रात अल्लाह की इबादत, कुरआन की तिलावत और नवाफिल पढ़ने का एहतिमाम करें. यह रात पटाखे छोड़ने और आतिशबाजी की रात नहीं है. इसे इस्लाम धर्म ने सख्ती से मना किया है. पटाखे के रुपये को गरीबों में दान कर दें. इस का पुन्य भी आप को मिलेगा और गरीबों का भला भी होगा. शब-ए-बरात इस्लाम धर्म में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में मनायी जाती है, जिसे विशेष रूप से मुसलमानों द्वारा आधिकारिक रूप से याद किया जाता है. यह अवसर हर साल 14वीं और 15वीं शाबान की रात को मनाया जाता है. शब-ए-बरात का शाब्दिक अर्थ ””माफी की रात”” है. जब अल्लाह अपने भक्तों की दुआएं सुनता है और उनके सभी पापों को माफ कर देता है. शब-ए-बरात बारे में कुरआन में अल्लाह फरमाते हैं कि इस रात में हर हिक्मत वाला काम बांट दिया जाता है, जिससे इसे बहुत ही शुभ माना जाता है. इस रात को ””लैलतुल बरात”” भी कहते हैं जिस का अर्थ है जहन्नुम से मुक्ति की रात. इस रात का धार्मिक महत्व इतना अधिक है कि मुसलमान इसे पूरे मन से इबादत करने और सच्ची तौबा करने का एक अवसर मानते हैं. शब-ए-बरात को मुसलमान खासकर रात को इबादत करने, कुरान की तिलावत करने, और तकवा में वृद्धि करने के रूप में मनाते हैं. मौलाना मो जहांगीर आलम महजूरूल क़ादरी ने बताया कि शब-ए-बरात के दिन किये गये अच्छे कार्यों और दुआओं का बहुत बड़ा प्रभाव होता है. इसी रात लोगों के गुनाह माफ होने के साथ-साथ अल्लाह की कृपा और बरकत भी प्राप्त होती है. महजूरूल क़ादरी ने मुस्लिम युवाओं से अपील की है इस महत्वपूर्ण रात को आतिशबाजी और पटाखों से बर्बाद नहीं करें. कुरआन की तिलावत करें, नमाज पढ़ें और क़ब्रिस्तान जाकर उन के नाम ईसाल-ए- सवाब ( फातेहा) पढ़ें.

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By Prabhat Khabar News Desk

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