नवादा: रजौली के सात गांवों में आज भी नहीं पहुंची बिजली, चिराग और डिबरी के सहारे कट रही जिंदगी

बिहार के रजौली प्रखंड के सात गांवों में विकास की रोशनी अब तक नहीं पहुंची है. दशकों से बिजली के अभाव में ग्रामीण चिराग और डिबरी के सहारे जीवन जीने को मजबूर हैं. बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा पर इसका गहरा असर पड़ रहा है.

Bihar electricity problem: रजौली प्रखंड अंतर्गत हरदिया पंचायत के पिपरा, परतौनिया, चोरडीहा, झराही, नावाडीह, जामुनदाहा और कोसदरिया गांव में विकास का उजाला अब तक नहीं पहुंच सका है. डिजिटल क्रांति और घर-घर बिजली पहुंचाने के सरकारी दावों के बीच इस दूरस्थ इलाके के लोग आज भी पीढ़ियों से चिराग और डिबरी के धुंधले उजाले में रात बिताने को मजबूर हैं. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उनके पूर्वज भी बिजली की रोशनी का सपना देखते-देखते इस दुनिया से चले गये, लेकिन व्यवस्था की अनदेखी के कारण गांव की तकदीर आज तक नहीं बदल सकी है.

अंधेरे में सिमटता बच्चों का भविष्य

बिजली के अभाव का सबसे गहरा प्रभाव गांव के बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है. जहां आसपास के गांवों के बच्चे रोशनी में पढ़ाई कर आधुनिक दुनिया से जुड़ रहे हैं, वहीं इन गांवों के बच्चे ढलती शाम के साथ पढ़ाई बंद करने को मजबूर हो जाते हैं. रात होते ही पूरा इलाका जहरीले कीड़े-मकोड़ों और सांप-बिच्छुओं के खौफ में तब्दील हो जाता है. केरोसिन तेल की किल्लत ने ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. ऐसे में रोजमर्रा के बुनियादी काम भी ग्रामीणों के लिए संघर्ष बन गये हैं.

प्रशासनिक फाइलों में दबे आवेदन, मिले सिर्फ आश्वासन

ग्रामीणों ने बिजली की समस्या से निजात पाने के लिए प्रशासन के कई स्तरों पर गुहार लगायी है. हाल ही में आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मिलकर अपनी समस्या बतायी और बिजली आपूर्ति शुरू कराने की मांग की. ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग ने काफी समय पहले गांव में महज दो-चार खंभे गाड़कर खानापूर्ति कर ली थी. इसके बाद काम पूरी तरह ठप पड़ गया.

ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों से सैकड़ों आवेदनों की रसीदें संभालकर रखने के बावजूद हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला. जमीनी स्तर पर समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अब तक ठोस पहल नहीं हो सकी है.

उम्मीद और संघर्ष के बीच रोशन भविष्य की राह

तमाम उपेक्षाओं और मुश्किलों के बावजूद हरदिया पंचायत के इन सुदूरवर्ती गांवों के लोगों ने उम्मीद नहीं छोड़ी है. ग्रामीणों के लिए बिजली महज बुनियादी सुविधा नहीं, बल्कि बच्चों की बेहतर शिक्षा, सुरक्षित जीवन और विकास की राह से जुड़ी जरूरत है. दशकों से अंधेरे में गुजर रही जिंदगी के बीच ग्रामीण अब भी इस उम्मीद में हैं कि उनके घरों तक भी बिजली की रोशनी पहुंचेगी.

अब ग्रामीणों की नजर शासन-प्रशासन की पहल पर टिकी है कि उनकी वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान कब होता है.

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By कुमार मनीष देव

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