Nawada News : रजौली प्रखंड सभागार में डिजिटल युग की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद 'प्री-टेस्ट सेंसस 2027' के अंतिम चरण की समीक्षा बैठक आयोजित की गई. वर्ष 2027 में प्रस्तावित देशव्यापी डिजिटल जनगणना को त्रुटिहीन और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से चलाए गए इस अभियान के समापन अवसर पर अधिकारियों ने फील्ड स्तर के अनुभवों, तकनीकी चुनौतियों और आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की. अधिकारियों ने कहा कि यह समीक्षा भविष्य की डिजिटल जनगणना की मजबूत आधारशिला साबित होगी.
शीर्ष अधिकारियों ने फील्ड अनुभवों और तकनीकी चुनौतियों पर किया मंथन
समीक्षा बैठक में सांख्यिकी निदेशालय के सहायक निदेशक राकेश गुप्ता, जिला नोडल पदाधिकारी अनूप कुमार वर्मा एवं सौरभ कुमार मौजूद रहे. अधिकारियों ने प्रगणकों और पर्यवेक्षकों के कार्यों की सराहना करते हुए उनसे सीधे संवाद किया. बैठक में 6 जून से 18 जून तक चले फील्ड सर्वे के दौरान सामने आई व्यावहारिक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई. प्रगणकों ने मोबाइल ऐप के संचालन, सर्वर की गति, दूरदराज क्षेत्रों में नेटवर्क की उपलब्धता तथा डेटा संग्रह के दौरान सामने आई चुनौतियों से अधिकारियों को अवगत कराया. इन सभी सुझावों और अनुभवों को संकलित किया गया, ताकि मुख्य जनगणना से पहले डिजिटल प्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं त्रुटिरहित बनाया जा सके.
बिहार के केवल दो क्षेत्रों में शामिल रहा रजौली
प्री-टेस्ट सेंसस के लिए पूरे बिहार में केवल दो क्षेत्रों का चयन किया गया था, जिनमें सारण जिले का सोनपुर और नवादा जिले का रजौली प्रखंड शामिल है. रजौली में इस अभियान को सफल बनाने की जिम्मेदारी 87 प्रगणकों और 15 पर्यवेक्षकों की टीम ने निभाई. टीम ने जोगियामारण, सिरोडावर और चितरकोली पंचायतों के गांवों में घर-घर जाकर डेटा संग्रह का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया. अभियान शुरू होने से पहले 1 जून से 3 जून तक सभी कर्मियों को मोबाइल ऐप, डिजिटल प्रक्रिया और जनगणना के नए प्रावधानों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया था. इसके बाद 6 जून से फील्ड सर्वे का कार्य प्रारंभ किया गया.
देशव्यापी डिजिटल जनगणना की तैयारी में अहम साबित होगा फीडबैक
सहायक निदेशक राकेश गुप्ता ने कहा कि रजौली और सोनपुर से प्राप्त फीडबैक केवल एक औपचारिक रिपोर्ट नहीं है, बल्कि वर्ष 2027 में होने वाली देशव्यापी डिजिटल जनगणना की रूपरेखा तैयार करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी. उन्होंने बताया कि आगामी जनगणना पूरी तरह पेपरलेस और डिजिटल होगी. ऐसे में प्री-टेस्ट के दौरान प्राप्त तकनीकी सुझाव और जमीनी अनुभव केंद्र सरकार के लिए उपयोगी साबित होंगे.
दो दिवसीय पुनरीक्षण अभियान में होगा आंकड़ों का सत्यापन
अधिकारियों ने बताया कि फील्ड सर्वे पूरा होने के बावजूद विभाग दो दिवसीय विशेष पुनरीक्षण अभियान चलाएगा. इस दौरान पर्यवेक्षक और प्रगणक मोबाइल ऐप में दर्ज आंकड़ों का दोबारा मिलान करेंगे. यदि कोई परिवार सर्वे से छूट गया हो अथवा किसी प्रविष्टि में तकनीकी त्रुटि रह गई हो तो उसे सुधारकर दोबारा अपलोड किया जाएगा. अधिकारियों ने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य आंकड़ों को पूरी तरह सटीक, प्रमाणिक और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि रजौली का यह मॉडल देशभर के लिए उदाहरण बन सके.
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