Nawada News : रजौली प्रखंड अंतर्गत रजौली पूर्वी पंचायत स्थित ऐतिहासिक लोमश ऋषि पहाड़ी पर रक्षाबंधन एवं श्रावण पूर्णिमा के पावन अवसर पर शुक्रवार को विशाल मेले का आयोजन होगा. धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले इस मेले में स्थानीय ग्रामीणों के अलावा नवादा सहित पड़ोसी जिलों से भी हजारों श्रद्धालुओं और दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है. मेले को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं. बच्चों के मनोरंजन के लिए विभिन्न प्रकार के झूले भी लगाए गए हैं. वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु पहाड़ी पर स्थित भगवान लोमश ऋषि की प्राचीन गुफा में मन्नत पूरी होने पर श्रद्धापूर्वक ध्वज-पताका अर्पित करते हैं और दिनभर मेले का आनंद लेते हैं.
सप्तऋषि पहाड़ियों की गोद में बसी पौराणिक तपोभूमि
सप्तऋषि पहाड़ियों की सुरम्य वादियों और प्रकृति की गोद में बसा रजौली का यह क्षेत्र पौराणिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्ध माना जाता है. मान्यता है कि रामायण काल में यह स्थान महर्षि लोमश और महर्षि याज्ञवल्क्य की प्रमुख साधनास्थली रहा है. श्रद्धालु करीब सवा सौ सीढ़ियों की चढ़ाई पूरी कर लोमश ऋषि और याज्ञवल्क्य ऋषि के पवित्र आश्रम तक पहुंचते हैं और अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए माथा टेकते हैं. श्रावण पूर्णिमा के दिन यहां पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है. इस अवसर पर पूरा पहाड़ी क्षेत्र श्रद्धालुओं के जयकारों से गुंजायमान रहता है.
रामायण सर्किट से जुड़ने की जगी उम्मीद
फोरलेन सड़क मार्ग पर स्थित सिमरकोल से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर सरमसपुर गांव के पास अवस्थित यह ऐतिहासिक स्थल आने वाले दिनों में बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है. हाल के दिनों में इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और विकास को लेकर प्रशासनिक एवं न्यायिक स्तर पर पहल शुरू हुई है. पटना हाईकोर्ट द्वारा राज्य के प्रधान सचिव के पत्र के आलोक में शुरू की गयी कार्रवाई के बाद इस क्षेत्र के रामायण सर्किट से जुड़ने की संभावनाएं बढ़ी हैं.
संरक्षण से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
यदि लोमश ऋषि और याज्ञवल्क्य ऋषि की प्राचीन गुफाओं समेत पूरे क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाता है, तो ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण का मार्ग भी प्रशस्त होगा. साथ ही क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और कारोबार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस ऐतिहासिक स्थल के विकास से नवादा जिले के सांस्कृतिक और आर्थिक परिदृश्य को भी नई दिशा मिलेगी.
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