हिसुआ. महर्षि दयानंद सरस्वती की 201वीं जयंती पर रविवार को आयोजित कवि सम्मेलन में नालंदा के हरनौत में प्रदेश के कवि और कवयित्री जुटे. उन्होंने काव्य पंक्तियों से महर्षि दयानंद सरस्वती को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए धार्मिक एकता, मानवता, सौहार्द, प्रेम और समन्वय का संदेश दिया. समसामयिक घटना और मुद्दों पर भी जमकर फुहार बरसायी. प्रदेश के अन्य जिलों के कवियों के साथ नवादा के व्यंग्यकार उदय भारती और गीत-गजलकार शफीक जानी नांदा का जलवा दिखा. उदय भारती ने आदमी में कम होती इंसानियत और वफादारी पर व्यंग्य करते हुए ‘लोगों से नहीं मिली वफादारी तो मैंने कुत्ता पाल लिया’ से इंसानियत बचाने का संदेश दिया. दूसरी कविता में पेड़ लगाने और पर्यावरण बचाओ के संदेश देते हुए पेड़-पौधों के नाम वर्णित पति-पत्नी का अनोखा संवाद प्रस्तुत किया. शफीक जानी नादां से देश की एकता, बड़े बुजुर्गों का सम्मान, सौहार्द और समन्वय का संदेश दिया. मान, अभिमान, स्वाभिमान हे हमर, युग-युग से ममता के पहचान हे हमर से खूब वाह-वाही लूटी. मुख्य अतिथि आरपीएस कॉलेज के प्राचार्य उपेंद्र प्रसाद सिन्हा और जीडीएम कॉलेज के प्राचार्य शंभूनाथ प्रसाद सिन्हा ने दीप चलाकर और मां सरस्वती व दयानंद सरस्वती की तस्वीर पर फूल माला अर्पित कर उद्घाटन किया. अध्यक्षता कवि एतवारी पंडित ने और संचालन मगही अकादमी के पूर्व अध्यक्ष उदय शंकर शर्मा ने किया. रामाश्रय झा, उमेश प्रसाद सिंह उमेश, उमेश बरादुरपुरी, जयराम देवसपुरी, राकेश बिहारी शर्मा, रंजीत दुधु, हेमंत कुमार, डॉ गरीबन साव, धनंजय श्रोत्रिय, चंद्र उदय कुमार, दयानंद बेधड़क, लता परासर, प्रो कुमारी सोनी, सुरेंद्र सिंह सुरेंद्र, सुमंत, नरेश कुमार दांगी, उपेंद्र नाथ वर्मा ने काव्य पाठ किया. धन्यवाद ज्ञापन मुखिया राम सिंह और सहयोग चंद्र उदय, सौरभ कुमार उर्फ सोनू सर सहित शिक्षक-शिक्षिकाओं ने किया. गायत्री विद्यापीठ की बच्चों ने रंगारंग प्रस्तुति दी. अतिथियों और कवियों को शॉल, उपहार और राशि देकर सम्मानित किया गया.
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