Nawada News(बब्लू कुमार): नवादा जिले के वारिसलीगंज में ‘गायों के नाम की जमीन’ पर भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों के अवैध कब्जे को लेकर प्रशासन अब बेहद सख्त रुख अपनाने जा रहा है. वारिसलीगंज गौशाला को अतिक्रमण मुक्त कराने और इसे फिर से पूरी तरह कार्यशील (एक्टिव) बनाने के लिए प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है. इसी कड़ी में मंगलवार को सदर अनुमंडल कार्यालय में सदर एसडीओ अमित अनुराग की अध्यक्षता में गौशाला विकास समिति की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला गव्य विकास पदाधिकारी तथा वारिसलीगंज के अंचल अधिकारी (CO) मुख्य रूप से मौजूद रहे.
3.40 एकड़ में से 2 एकड़ से अधिक भूमि पर अवैध कब्जा, जर्जर हुआ भवन
समीक्षा बैठक के दौरान वारिसलीगंज स्थित ऐतिहासिक गौशाला की वर्तमान दयनीय स्थिति पर अधिकारियों के बीच विस्तार से चर्चा की गई. बैठक में वारिसलीगंज के अंचल अधिकारी ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए एक चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश की. सीओ ने बताया कि गौशाला के नाम पर कुल भूमि लगभग 3.40 एकड़ दर्ज है, लेकिन वर्तमान में इसके दो एकड़ से भी अधिक के बड़े हिस्से पर स्थानीय भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों द्वारा अवैध कब्जा किया जा चुका है. देखरेख के अभाव में गौशाला की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई है; पूरे परिसर में फिलहाल एक भी गाय नहीं रह रही है और वहां निर्मित पुराना सरकारी भवन भी पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है.
जल्द चलेगा प्रशासन का बुलडोजर, समाजसेवियों को जोड़कर शुरू होगा संचालन
इस गंभीर मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए सदर एसडीओ अमित अनुराग ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट लहजे में निर्देश दिया कि गौशाला की अतिक्रमित भूमि को चिन्हित कर जल्द से जल्द हर हाल में खाली कराया जाए और उस पूरी जमीन को पुनः गौशाला के मूल उपयोग में लाया जाए. उन्होंने कहा कि उपेक्षित पड़ी इस गौशाला को फिर से सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशासन स्तर पर एक ठोस कार्ययोजना के तहत पहल की जाएगी. इसके साथ ही, वारिसलीगंज सहित नवादा के आसपास के क्षेत्रों के प्रबुद्ध समाजसेवियों और गौ-भक्तों को इस विकास समिति से जोड़ा जाएगा, ताकि इसके दैनिक संचालन और प्रबंधन को वित्तीय व सामाजिक रूप से मजबूत किया जा सके.
एसडीओ का निर्देश: सदर एसडीओ ने जिला पशुपालन पदाधिकारी एवं वारिसलीगंज अंचल अधिकारी को संयुक्त रूप से निर्देशित किया कि वे अविलंब गौशाला के वर्तमान सचिव और अन्य कार्यकारिणी सदस्यों से संपर्क स्थापित करें. सभी हितधारकों के साथ मिलकर इस विशेष अतिक्रमण हटाओ अभियान को प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाया जाए, ताकि वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रही इस ऐतिहासिक गौशाला को पुनः एक नई और गौरवशाली पहचान दिलाई जा सके.
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