Nawada News(दशरथ मिस्त्री): प्रखंड मुख्यालय के कौआकोल बाजार स्थित आर्य समाज मंदिर परिसर में रविवार को एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया. आर्य वीर दल बिहार प्रदेश के मार्गदर्शक सह संचालक कुंदन आर्य के आह्वान पर आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता कौआकोल प्रखंड आर्य समाज के प्रधान युगल किशोर आर्य ने की. बैठक की सबसे खास बात यह रही कि इसमें स्थानीय अनुसूचित एवं आदिवासी क्षेत्र के बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया और समाज निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प लिया.
सर्वसम्मति से चुनी गई कौआकोल आर्य वीर दल की नई टीम
बैठक के दौरान संगठन की मजबूती और विस्तार को लेकर उपस्थित प्रबुद्ध जनों एवं युवाओं के बीच गहन विचार-विमर्श हुआ. इसके बाद सर्वसम्मति से क्षेत्रीय ‘आर्य वीर दल’ की कार्यकारिणी कमेटी का गठन किया गया, जिसमें युवाओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं. बता दें कि संचालक की भूमिका में लखन कुमार नजर आएंगे वहीं सह संचालक चंदन कुमार, मंत्री: रंधीर कुमार आर्य, उपमंत्री: आयुष कुमार और कोषाध्यक्ष की जीमेदारी रामरतन आर्य को दी गयी है.
चरित्र निर्माण और समाज सेवा ही संगठन का मुख्य संकल्प: कुंदन आर्य
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ताओं और प्रदेश मार्गदर्शक कुंदन आर्य ने आर्य समाज एवं आर्य वीर दल की प्रासंगिकता और युवाओं के लिए इसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि आर्य वीर दल के गठन का मुख्य उद्देश्य समाज की निस्वार्थ सेवा करना, युवाओं में उच्च नैतिक चरित्र का निर्माण करना तथा सनातन वैदिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना है.
इसके साथ ही, बैठक में ग्रामीण स्तर पर बालवाड़ी केंद्रों के सुचारू रूप से संचालन करने और महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक मजबूत महिला संगठन के गठन की जरूरत पर भी विशेष जोर दिया गया.
वैदिक साहित्य भेंट कर युवाओं का सम्मान, कई गणमान्य रहे मौजूद
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे युगल किशोर आर्य ने नई कमेटी में शामिल सभी युवाओं और उपस्थित सदस्यों को माला पहनाकर उनका स्वागत किया. साथ ही, युवाओं को जीवन में सही मार्गदर्शन के लिए पवित्र वैदिक साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया.
इस सांगठनिक मौके पर विन्देश्वरी मंडल, कृष्णनंदन आर्य, चंदेश्वर बाबू, संतोष आर्य, निलेश, अयोध्या पासवान, श्रवण साव, डॉ. चंद्रिका प्रसाद और मुकलेश सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और आर्य समाज से जुड़े श्रद्धालु मुख्य रूप से उपस्थित रहे.
