Nawada Dumping Zone : नवादा शहर में कचरा प्रबंधन की समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी है. स्थायी डंपिंग जोन नहीं होने का खामियाजा पिछले करीब 10 दिनों से शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है. कचरा उठाव लगभग ठप है. शहर की गलियों, मोहल्लों और प्रमुख सड़कों के किनारे कचरे का ढेर जमा है.
स्थिति यह है कि जिन इलाकों से अधिकारियों और प्रशासनिक पदाधिकारियों का नियमित आना-जाना होता है, वहां से कचरा उठाया जा रहा है. लेकिन उसे शहर से बाहर ले जाकर निस्तारित करने के बजाय दूसरे कचरा प्वाइंट पर गिराये जाने की शिकायतें हैं. इससे समस्या का समाधान होने के बजाय एक जगह से उठाकर दूसरी जगह पहुंचायी जा रही है.
जहां गड्ढा मिला, वहीं डाल दिया कचरा
नवादा शहर में डंपिंग जोन की कहानी भी वर्षों पुरानी है. स्थायी और वैज्ञानिक कचरा निस्तारण स्थल विकसित नहीं होने के कारण जहां गड्ढा मिला, वहीं कचरा भरने की व्यवस्था बनती चली गयी. करीब 35 वर्षों तक खुरी नदी के आसपास शहर का कचरा डंप किया जाता रहा. इससे नदी और उसके आसपास का क्षेत्र कचरे के बोझ से दबता चला गया. अब भी शहर को इस समस्या से स्थायी निजात नहीं मिल सकी है.
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रोज निकलता है 80 टन कचरा, डंपिंग के लिए 35 किमी दूर जगह
नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी समीर कुमार ने बताया कि शहर से प्रतिदिन करीब 80 टन कचरा उठाया जाता है. इतनी बड़ी मात्रा में कचरे के निस्तारण के लिए उपयुक्त जमीन की जरूरत होती है. उन्होंने बताया कि डंपिंग के लिए शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर एक स्थान चिह्नित किया गया है. जगह का इंतजाम कर लिया गया है और बहुत जल्द शहर से कचरा उठाव शुरू कर दिया जायेगा.
उन्होंने बताया कि पिछले करीब 15 महीने से बड़ेल गांव में कचरा डंप किया जा रहा था. अब वहां के भूस्वामी द्वारा कचरा गिराने से मना कर दिया गया है. इसके बाद शहर में कचरा उठाव की व्यवस्था प्रभावित हुई है.
कचरा उठाकर दूसरे प्वाइंट पर गिराने से बढ़ी परेशानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में कचरा उठाव की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है. एक मोहल्ले से कचरा उठाकर दूसरे स्थान पर गिरा देने से समस्या समाप्त नहीं होती, बल्कि उसका स्थान बदल जाता है. लोगों ने कहा कि कई जगहों पर कचरे का ढेर इतना बढ़ गया है कि आने-जाने में भी परेशानी होने लगी है.
दुर्गंध और गंदगी के कारण आसपास रहने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है. स्थानीय दुकानदार का कहना है कि शहर में रोजाना इतना कचरा निकलता है, लेकिन उसके निस्तारण की स्थायी व्यवस्था आज तक नहीं बन पायी. हर बार अस्थायी जगह खोजकर समस्या को कुछ समय के लिए टाल दिया जाता है.
स्थायी समाधान के बिना खत्म नहीं होगी समस्या
शहरवासियों का कहना है कि नवादा में कचरा प्रबंधन को अब प्राथमिकता के आधार पर लिया जाना चाहिए. महज कचरा उठाकर किसी दूसरे स्थान पर गिरा देना स्थायी समाधान नहीं है. वैज्ञानिक तरीके से कचरे का पृथक्करण, प्रसंस्करण और निस्तारण करने के लिए स्थायी डंपिंग एवं प्रोसेसिंग स्थल विकसित करना जरूरी है.
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस व्यवस्था नहीं बनी, तो बढ़ती आबादी के साथ कचरे की समस्या आने वाले दिनों में और विकराल रूप ले सकती है.
