नवादा रेलवे अस्पताल में सुविधाओं का अभाव, मात्र एक नियमित डॉक्टर

NAWADA NEWS.एक ओर जहां भारतीय रेलवे को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर हाइटेक बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नवादा स्थित रेलवे अस्पताल बदहाली का दंश झेल रहा है. अत्याधुनिक ट्रेनों, डिजिटल टिकटिंग, स्मार्ट स्टेशन और तेज रफ्तार रेल सेवाओं की बातें तो हो रही हैं, लेकिन रेलकर्मियों और उनके परिजनों के इलाज के लिए बना रेलवे अस्पताल अब भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है.

अस्पताल पर 800 से अधिक रेलकर्मियों, अधिकारियों व उनके परिजनों की स्वास्थ्य जिम्मेदारीएक फार्मासिस्ट और तीन हॉस्पिटल अटेंडेंट ही संभाल रहे हैं पूरे अस्पताल की व्यवस्था

फ़ोटो कैप्शन-नवादा रेलवे अस्पताल

प्रतिनिधि, नवादा नगर

एक ओर जहां भारतीय रेलवे को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर हाइटेक बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नवादा स्थित रेलवे अस्पताल बदहाली का दंश झेल रहा है. अत्याधुनिक ट्रेनों, डिजिटल टिकटिंग, स्मार्ट स्टेशन और तेज रफ्तार रेल सेवाओं की बातें तो हो रही हैं, लेकिन रेलकर्मियों और उनके परिजनों के इलाज के लिए बना रेलवे अस्पताल अब भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. जबकि नवादा रेलवे अस्पताल पर 800 से अधिक रेलकर्मियों, अधिकारियों और उनके परिजनों की स्वास्थ्य जिम्मेदारी है. इसके बावजूद यहां संसाधनों और स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है. अस्पताल में केवल एक नियमित डॉक्टर कार्यरत हैं, जो सोमवार से शनिवार तक अपनी सेवाएं देते हैं. इसके अलावा एक फार्मासिस्ट और तीन हॉस्पिटल अटेंडेंट ही पूरे अस्पताल की व्यवस्था संभाल रहे हैं.

बेड और आधुनिक उपकरणों की भारी कमी

रेलवे अस्पताल में बेड की समुचित व्यवस्था नहीं है. यहां महज एक-दो बेड उपलब्ध हैं, जो गंभीर मरीजों के लिए नाकाफी हैं. एक्स-रे, इसीजी, अल्ट्रासाउंड जैसी जांच सुविधाएं पूरी तरह से नदारद हैं. न एंबुलेंस की व्यवस्था है और न ही प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता. ऐसे में गंभीर बीमारियों या दुर्घटना के मामलों में मरीजों को सीधे गया मंडल रेलवे अस्पताल या निजी अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है.

रोजाना पहुंचते हैं 15 से 20 मरीज

रेलवे अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. सामान्य सर्दी-खांसी, बुखार, बीपी और शुगर जैसी बीमारियों का प्राथमिक उपचार यहीं किया जाता है. फार्मासिस्ट उपलब्ध दवाओं के आधार पर मरीजों को दवा देते हैं. लेकिन, संसाधनों की कमी के कारण संपूर्ण इलाज संभव नहीं हो पाता.

रेल कर्मियों ने सुनायी पीड़ा

रेल कर्मियों का कहना है कि पहले रेलवे अस्पताल से कुछ हद तक ही राहत मिलती थी, लेकिन अब हालात और बिगड़ गये हैं. हल्की बीमारी में भी कई बार बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है. गंभीर बीमारी की स्थिति में रेलवे अस्पताल केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गया है. इससे रेलकर्मियों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है.

क्या कहती हैं अस्पताल की चिकित्सक

रेलवे अस्पताल की नियमित चिकित्सक डॉ सौम्या ने बताया कि सीमित संसाधनों और स्टाफ के बावजूद मरीजों को बेहतर प्राथमिक उपचार देने का प्रयास किया जाता है. उन्होंने कहा कि अस्पताल में डॉक्टर, फार्मासिस्ट और एचए की संख्या जरूरत के मुकाबले काफी कम है. आधुनिक जांच उपकरण और बेड की कमी के कारण गंभीर मरीजों को रेफर करना मजबूरी बन जाती है. यदि स्टाफ और संसाधन बढ़ाये जाये तो रेलकर्मियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती हैं.

हाइटेक रेलवे बनाम जमीनी हकीकत

वर्तमान में रेलवे को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में बड़े-बड़े दावे किये जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि रेलकर्मियों के स्वास्थ्य से जुड़ी बुनियादी व्यवस्था पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा. नवादा का रेलवे अस्पताल इसका जीता-जागता उदाहरण है. रेल कर्मियों और उनके परिवारों की मांग है कि अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाए, आधुनिक जांच मशीनें उपलब्ध हो, बेड और नर्सिंग स्टाफ की व्यवस्था की जाये, ताकि हाइटेक रेलवे की तस्वीर स्वास्थ्य सेवाओं में भी नजर आ सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Vishal kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >