निर्माण के 147 साल बाद भी किऊल-गया रेलखंड पर ट्रेनों की रफ्तार सुस्त
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Nawada news. किऊल-गया रेलखंड के इतिहास में पन्ने तो बहुत पलटे गये, लेकिन ट्रेनों की रफ्तार अब भी दशकों पुरानी स्थिति में ही अटकी है.
130 किमी की दूरी तय करने में अब भी लग रहे पांच से छह घंटे
दोहरीकरण और विद्युतीकरण के बावजूद नहीं बढ़ी रेलगाड़ियों की स्पीडदानापुर रेल मंडल के ”मनमाने” रवैये से पैसेंजर ट्रेनें घंटों खड़ी रहती हैं हॉल्ट पर, यात्रियों में बढ़ रहा आक्रोश.फोटोकैप्शन- गया-हावड़ा एक्सप्रेस का फाइल फोटो.
.प्रतिनिधि, नवादा कार्यालय
किऊल-गया रेलखंड के इतिहास में पन्ने तो बहुत पलटे गये, लेकिन ट्रेनों की रफ्तार अब भी दशकों पुरानी स्थिति में ही अटकी है. इस रेलखंड के अस्तित्व में आने के 147 वर्ष बीत जाने के बाद भी यात्रियों को गति के नाम पर सिर्फ निराशा हाथ लग रही है. हालांकि, रेलवे ने पुरानी पटरियां बदलकर आधुनिक रैक उपलब्ध करा दिए हैं और ट्रैक को 110 किमी प्रति घंटा की रफ्तार के काबिल भी बनाया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि 130 किलोमीटर की दूरी तय करने में अब भी पांच से छह घंटे का समय बर्बाद हो रहा है.
ग्रैंड कार्ड लाइन से काफी पीछे छूटा यह खंड
गौरतलब हो कि किऊल-गया रेलखंड पर रेल परिचालन 1879 में शुरू हुआ था, जबकि हावड़ा-गया-दिल्ली ग्रैंड कार्ड लाइन 1906 में शुरू हुई. आज ग्रैंड कार्ड लाइन आधुनिकता के शिखर पर है, जहाँ दर्जनों लंबी दूरी की सुपरफास्ट ट्रेनें दौड़ रही हैं, वहीं किऊल-गया खंड आज भी एक मात्र एक्सप्रेस ट्रेन (13023/24 हावड़ा-गया एक्सप्रेस) के भरोसे है, जिसे 2003 में तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार ने शुरू किया था.
दोहरीकरण और बिजली के बाद भी ”ब्रेक” पर सफर
रेलवे ने इस खंड का दोहरीकरण (डबल लाइन) कर दिया है और यह पूरी तरह इलेक्ट्रिक भी हो चुका है, फिर भी समय की बचत नहीं हो पा रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि दानापुर रेल मंडल के मनमाने रवैये के कारण पैसेंजर ट्रेनें किऊल से खुलने के बाद करौटा और पतनेर जैसे हॉल्टों पर घंटों खड़ी कर दी जाती हैं. स्टेशनों पर बिना किसी ठोस कारण के ट्रेनों को रोकने से दैनिक यात्रियों की फजीहत हो रही है.
सांसद के दावों और धरातल की हकीकत में अंतर
वर्तमान सांसद विवेक ठाकुर द्वारा रेल विस्तार के दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं. आम लोगों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में वंदे भारत और साप्ताहिक अमृत भारत के अलावा कोई ठोस नई ट्रेन नहीं मिली है. क्षेत्र के लोगों की मांग है कि साप्ताहिक ट्रेनों के बजाय डेली सर्विस की संख्या बढ़ायी जाये और पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन समय को दुरुस्त किया जाए ताकि नए निर्माण और दोहरीकरण का वास्तविक लाभ आम यात्रियों को मिल सके. वहीं, किऊल-गया रेलखंड पर ट्रेनों की औसत रफ्तार बढ़ायी जाये और पैसेंजर ट्रेनों को प्राथमिकता देते हुए परिचालन समय में सुधार किया जाये.
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