Nawada News: नवादा जिले के रजौली अनुमंडल अंतर्गत फरका बुजुर्ग पंचायत के गगन खुर्द गांव से एक बेहद परेशान करने वाला मामला सामने आया है, जहां महादलित समाज के लोगों का जीना दूभर हो गया है. गांव के महादलित टोले से मुख्य सड़क को जोड़ने वाली गली, जो यादव टोले से होकर गुजरती है, उस पर स्थानीय दबंगों द्वारा पूरी तरह से कब्जा कर लिया गया है. इस हठधर्मिता और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के लिए पीड़ित ग्रामीण एकजुट होकर अनुमंडल पदाधिकारी कार्यालय पहुंचे. ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर वे पहले भी आलाधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन निचले स्तर पर बैठे अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है, जिसके कारण आज वे अनुमंडल कार्यालय में न्याय की भीख मांगने को मजबूर हैं.
दबंगई और अतिक्रमण से नारकीय बनी जिंदगी
ग्रामीण द्वारिका रविदास और गरभू रविदास ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि पिछले पांच-छह सालों से जिस नाली के सहारे पूरे टोले के पानी की निकासी हो रही थी, उसे गांव के ही कुछ रसूखदार लोगों ने जबरन मिट्टी भरकर बंद कर दिया है. इनके अनुसार स्वर्गीय चरित्तर यादव के पुत्र किशुन यादव और सरजू यादव ने अपने घर से लेकर राजू यादव के घर तक सड़क के दोनों किनारों पर अवैध अतिक्रमण कर लिया है. नाली को पूरी तरह से भर दिए जाने के कारण अब पूरे टोले का गंदा और दूषित पानी मुख्य सड़क पर बह रहा है. सड़क पर करीब एक फीट तक कीचड़ और बदबूदार पानी जमा हो गया है, जिससे होकर छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को रोजाना मजबूरन हेलकर आना-जाना पड़ता है.
विरोध करने पर मारपीट की धमकी और टालमटोल
महादलित समाज के पीड़ितों का कहना है कि जब भी वे इस अवैध कब्जे और जलजमाव का विरोध करने दबंगों के पास जाते हैं, तो उनके साथ न सिर्फ बदसलूकी की जाती है बल्कि उन्हें मारपीट की धमकी भी दी जाती है. गरभू रविदास ने बताया कि जब वे नाली खोलने की बात कहते हैं, तो उन्हें उलझाया जाता है और कहा जाता है कि कभी पूरब जाओ तो कभी पश्चिम जाओ, यानी उनकी समस्या का समाधान करने के बजाय उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है. जातिगत और सामाजिक रूप से कमजोर होने के कारण ये महादलित परिवार गांव में खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहे हैं, क्योंकि दबंगों के आगे उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है.
जनता दरबार के आदेश को भी अंचल अधिकारी ने डाला ठंडे बस्ते में
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही है. ग्रामीणों ने इस नारकीय स्थिति से निजात पाने के लिए जिला जनता दरबार, नवादा में भी गुहार लगाई थी. जनता दरबार द्वारा बाकायदा पत्रांक संख्या 82/10/1/2026 के माध्यम से अंचल अधिकारी रजौली को इस मामले में तुरंत जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था. इसके बावजूद, रजौली अंचल अधिकारी ने इस संवेदनशील मामले पर कोई संज्ञान नहीं लिया और न ही मौके पर जाकर अतिक्रमण हटाने की कोई जहमत उठाई. अधिकारियों की इसी शिथिलता के कारण दबंगों के हौसले और बुलंद हो गए हैं तथा ग्रामीणों की समस्या जस की तस बनी हुई है.
सरकारी अमीन से नापी कराकर रास्ता बहाल करने की मांग
अंचल कार्यालय से निराश होने के बाद अब द्वारिका रविदास, गरभू रविदास, महेंद्र रविदास, सुजीत रविदास सहित टोले के दर्जनों पुरुषों और महिलाओं ने अनुमंडल पदाधिकारी को लिखित आवेदन सौंपकर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है. ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन अविलंब सरकारी अमीन को मौके पर भेजकर दोनों पक्षों की जमीनों और सरकारी सड़क की सही नापी करवाए. नापी करवाकर जो भी अवैध अतिक्रमण किया गया है, उसे बलपूर्वक मुक्त कराया जाए ताकि महादलित टोले के लोगों के लिए आने-जाने का रास्ता साफ हो सके. ग्रामीणों ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा है कि यदि जल्द ही नाली और सड़क का निर्माण कराकर उन्हें इस नारकीय जीवन से मुक्ति नहीं दिलाई गई, तो वे आगे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे. इस संबंध में एसडीएम स्वतंत्र कुमार सुमन ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है और अंचलाधिकारी को जांच कर आवश्यक कार्रवाई को लेकर निर्देशित किया गया है.
