Nawada Candle March : नवादा शहर के निजी अस्पतालों पर प्रशासन की हालिया कार्रवाई के बाद अब डॉक्टरों में नाराजगी खुलकर सामने आ गई है. शुक्रवार देर रात इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी आईएमए की एक अहम बैठक हुई, जिसमें प्रशासन की कार्रवाई को गलत बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया गया. इस बैठक की अध्यक्षता आईएमए के अध्यक्ष डॉ बीके शर्मा ने की. बैठक में आगे की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा हुई और कई अहम निर्णय लिए गए.
बैठक के दौरान डॉक्टरों ने साफ कहा कि जिस तरीके से अस्पतालों और क्लिनिक पर कार्रवाई की गई, उससे पूरे मेडिकल समुदाय में असंतोष का माहौल है. आईएमए ने इसे गैर जरूरी और अनुचित कदम बताया है.
स्टाफ को हिरासत में लेने पर नाराजगी
बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में आईएमए ने कहा कि गुरुवार को प्रशासन ने शहर के कई प्रतिष्ठित और पंजीकृत डॉक्टरों के क्लिनिक में काम करने वाले कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया. संगठन ने इसे पूरी तरह गैरकानूनी और गलत बताया है.
आईएमए ने मांग की है कि जिन कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है उन्हें तुरंत रिहा किया जाए. साथ ही जिन क्लिनिक पर एफआईआर दर्ज की गई है, उन्हें वापस लिया जाए और भविष्य में इस तरह की कार्रवाई नहीं दोहराई जाए.
नियमों को लेकर भी उठाए सवाल
आईएमए ने यह भी आरोप लगाया कि छापेमारी करने वाले अधिकारियों को बिहार लघु एवं मध्यम स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठान स्थापना एवं पंजीकरण नियमावली 2026 की सही जानकारी नहीं है या फिर उसके नियमों को नजरअंदाज किया गया है.
डॉक्टरों का कहना है कि वे अपने अस्पतालों और क्लिनिक का पंजीकरण कराना चाहते हैं, लेकिन फायर सेफ्टी से जुड़ी जटिल प्रक्रिया बड़ी परेशानी बन रही है. ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि पंजीकरण और फायर सेफ्टी की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाया जाए ताकि डॉक्टर बिना किसी दिक्कत के नियमों का पालन कर सकें.
आज निकलेगा कैंडल मार्च
आईएमए ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए इसकी रिपोर्ट राज्य स्तर पर भेजने का निर्णय लिया है. साथ ही शनिवार की शाम नवादा शहर में डॉक्टरों द्वारा कैंडल मार्च निकाला जाएगा.
इसके बाद आईएमए का एक प्रतिनिधिमंडल जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपेगा. डॉक्टरों का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो वे आगे आंदोलन को और तेज करेंगे.
नवादा में निजी अस्पतालों पर हुई कार्रवाई अब प्रशासन और डॉक्टरों के बीच टकराव का रूप लेती दिख रही है. एक तरफ डॉक्टर अपने अधिकार और सम्मान की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन नियमों के पालन की बात कर रहा है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या डॉक्टरों की मांगों पर कोई ठोस पहल होती है या नहीं.
