नवादा: वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने की मांग, कांग्रेस सेवादल ने किया धरना-प्रदर्शन

बिहार कांग्रेस सेवा दल ने नवादा में वित्त रहित शिक्षा नीति को समाप्त करने और शिक्षकों के लिए नियमित वेतनमान व सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर धरना दिया।

Nawada News : नवादा में वित्त रहित शिक्षा नीति समाप्त करने, वित्त रहित विद्यालयों एवं महाविद्यालयों का समायोजन करने तथा वर्षों से कार्यरत शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा, पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा देने की मांग को लेकर बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवादल का राज्यव्यापी आंदोलन गुरुवार को नवादा पहुंचा. नवादा जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष प्रभाकर झा की अध्यक्षता में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर पार्क में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया. इसमें वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था समाप्त करने की मांग प्रमुखता से उठायी गयी.

चार दशक से शिक्षा व्यवस्था में योगदान

बिहार प्रदेश कांग्रेस सेवादल के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजय यादव ने कहा कि वित्त रहित विद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी पिछले चार दशकों से बिहार की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. सीमित संसाधनों और अनेक कठिनाइयों के बावजूद इन शिक्षकों ने विद्यार्थियों को शिक्षा देने और उनका भविष्य संवारने का काम किया है.

उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि जिन शिक्षकों ने अपना जीवन विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में लगा दिया, उनका अपना भविष्य आज भी अनिश्चित है. सरकार को उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान करना चाहिए.

सम्मानजनक जीवन और सुरक्षित सेवा की मांग

कांग्रेस सेवादल के प्रभारी अफरोज खान ने कहा कि शिक्षक केवल वेतन की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि सम्मानजनक जीवन, सुरक्षित सेवा और भविष्य की सामाजिक सुरक्षा चाहते हैं. उन्होंने सरकार से वित्त रहित शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की.

जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रभाकर झा ने वित्त रहित शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया. एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष सूरज यादव ने आंदोलनकारियों की मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण पदयात्रा निकाली.

शिक्षकों ने शिक्षा व्यवस्था में योगदान बताया

मंच संचालन पूर्व प्रखंड अध्यक्ष विजय कुमार ने किया. मौके पर डॉ. नरेंद्र सिंह, उपेंद्र सिंह, राकेश कानन, डॉ. राधेश्याम शर्मा, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. आनंद कुमार, एसपी सिंह, प्रो. कामेश्वर मिस्त्री, प्रो. उदय शंकर, प्रो. संजय पांडे, मनोज कुमार, संदीप पासवान, सत्येंद्र प्रसाद, रविंदर कुमार, बालेश्वर यादव, सुरेंद्र यादव, रामजन्म सिंह, अरुण कुमार, गरीबन मुखिया, मुकेश पासवान, विनोद कुमार, कृष्ण कुमार प्रभाकर, संजय सिंह, उमाशंकर रजक, रामाशीष कुमार, अंजनी कुमार पप्पू समेत विभिन्न शिक्षक और कांग्रेसी नेता मौजूद रहे.

वक्ताओं ने कहा कि वित्त रहित विद्यालयों और महाविद्यालयों ने बिहार में शिक्षा के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों और कर्मचारियों को अब नियमित वेतनमान, सेवा सुरक्षा, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलना चाहिए.


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By मनोज कुमार

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