अस्पताल में सुरक्षा गार्डों की मनमानी व अभद्र व्यवहार से मरीज व चिकित्सक परेशान

चिकित्सकों सुरक्षा गार्डों पर समय से नहीं पहुंचने का लगाया आरोप

रजौली़ मुख्यालय स्थित अनुमंडलीय अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्डों की मनमानी व दुर्व्यवहारपूर्ण व्यवहार से मरीज, परिजनों समेत चिकित्सकों को काफी परेशानी हो रही है़ अस्पताल में गार्ड की नियुक्ति के दौरान रजौली क्षेत्र के बहुत सारे लोगों की नियुक्ति कर दी गयी थी़ इसके बाद लोकल होने के कारण नियुक्त गार्ड सुनिश्चित समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते हैं. इससे मरीजों व परिजनों को परेशानी होती है़ गार्ड न ही कभी ड्रेस कोड का इस्तेमाल करते हैं और न चिकित्सक के आदेशों का पालन करते हैं. यदि कोई चिकित्सक कुछ कहते हैं, तो गार्ड चिकित्सक से उलझ जाते हैं व अभद्र व्यवहार से चिकित्सक के जुबां को बंद करने पर मजबूर कर देते हैं. एयर कंडीशन में चिकित्सक के साथ बैठ करते हैं ड्यूटी अस्पताल के सुरक्षा गार्ड लोकल होने का धौंस मरीजों व स्वास्थ्यकर्मियों पर दिखाते हुए मनमानी पूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं. शनिवार के दिन ओपीडी में डॉ निवेदिता नंदिनी और डॉ अनुज कुमार मरीजों को देख रहे थे. वहीं, उनके कमरों में चल रहे एयर कंडीशन में सुरक्षा गार्ड सागर कुमार भी एक कुर्सी लगाकर बैठे थे. ओपीडी के मरीज बिना किसी लाइन में लगे धक्का-मुक्की और शोर करते हुए चिकित्सक के पास जाने की होड़ में जुटे हुए थे. इससे चिकित्सक को मरीजों का इलाज करने में काफी परेशानी हो रही थी. इस दौरान डॉ अनुज कुमार एक मरीज के ऑपरेशन के लिए 15 मिनट के लिए चले गये. ओपीडी में बैठी महिला चिकित्सक डॉ निवेदिता नंदिनी ने सुरक्षा गार्ड को 10 बार बोली कि ऐसे भीड़ में मरीजों को देखने में परेशानी हो रही है. इसके बावजूद सुरक्षा गार्ड सागर कुमार महिला चिकित्सक की बातों को अनसुना कर अपनी कुर्सी पर डटा रहा. वहीं, मरीज जनार्दन प्रसाद ने बताया कि सुरक्षा गार्ड को ओपीडी गेट के बाहर बैठकर मरीजों के भीड़ को नियंत्रित करना चाहिए था, ताकि लोग एक-एक करके अपना इलाज करवा पाएं. सुरक्षा गार्डों के दुर्व्यवहार से धूमिल हो रही अस्पताल की छवि अनुमंडलीय अस्पताल में इलियट फाल्कन्स द्वारा 10 सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति की गयी थी. इनमें एक महिला सुरक्षा गार्ड की मौत बीते कुछ माह पूर्व हो चुकी है. अस्पताल में सुरक्षा गार्ड के रूप में सागर कुमार, रामदेव यादव, सुनील कुमार, बृजनंदन कुमार, बबीता देवी, विनोद सिंह, जितेंद्र कुमार-1, जितेंद्र कुमार-2 व अखिलेश कुमार हैं. इनमें से किसी के द्वारा गार्ड का यूनिफॉर्म नहीं पहना जाता है. वहीं, कुछ सुरक्षा गार्डों के द्वारा अस्पताल में आनेवाले मरीज व उनके परिजन समेत चिकित्सक व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ हल्ला-हंगामा एवं अभद्र व्यवहार किया जाता है. सुरक्षा गार्डों की मनमानी से अस्पताल की छवि ग्रामीणों की नजर में धूमिल हो रही है और लोगों को सरकारी व्यवस्था से विश्वास उठते जा रहा है. शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं अस्पताल के प्रभारी डीएस डॉ दिलीप कुमार ने बताया कि अस्पताल में एक-दो को छोड़कर अन्य सुरक्षा गार्ड अपने कर्तव्यों के निर्वहन में काफी अनियमितता बरतते हैं. सुरक्षा गार्ड समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते हैं. आदेश की अवहेलना करते हैं. इसका प्रतिकूल प्रभाव अस्पताल की छवि पर पड़ रहा है. प्रभारी डीएस ने बताया कि सुरक्षा गार्ड को नियुक्त करने वाली संस्था को 2023 से लेकर 2025 तक दो बार स्पष्टीकरण मांगा किया गया है. किंतु, अब तक कोई जवाब नहीं मिला है, जो इलियट फाल्कन्स के मनमानेपन और स्वेच्छाचारी को दर्शाता है. क्या कहते हैं सिविल सर्जन अनुमंडलीय अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्ड से संबंधित शिकायत मिली है. दुर्व्यवहार करने वाले सुरक्षा गार्ड के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जायेगी. साथ ही उन्होंने कहा कि वे स्वयं अस्पताल का निरीक्षण कर स्वास्थ्यकर्मियों से बातचीत करेंगे. डॉ. बिनोद कुमार चौधरी, सिविल सर्जन, नवादा

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By Panchdev kumar

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