Nawada News: नवादा जिले के मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग में सरकारी राजस्व से जुड़ा एक गंभीर मामला उजागर हुआ है. वाहनों की नीलामी से प्राप्त लाखों रुपये सरकारी खाते में जमा न कराने पर मद्य निषेध अधीक्षक ने नगर थाना में कार्यालय के निम्नवर्गीय लिपिक विरेंद्र भगत के खिलाफ गबन और धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कराई है.
नकद राशि लेकर दी रसीद
29 नवंबर 2024 को आयोजित आम नीलामी में दरियापुर निवासी सन्नी कुमार और केवाली निवासी कृष्ण कृपाल ने वाहनों की बोली लगाई थी. दोनों नीलामीकर्ताओं ने लिपिक विरेंद्र भगत को क्रमश: 73,336 रुपये और 1,01,764 रुपये नकद दिए थे. आरोपी लिपिक ने नीलामी आवेदन की रसीद के पीछे अपने हस्ताक्षर कर राशि प्राप्ति का प्रमाण दिया था.
जांच में सामने आई गड़बड़ी
विभागीय जांच में जब अभिलेखों का मिलान किया गया तो उक्त राशि का कोई भी चालान या सरकारी जमा रसीद उपलब्ध नहीं मिली. जनवरी 2025 से आरोपी लिपिक विरेंद्र भगत बिना किसी सूचना के कार्यालय से लगातार अनुपस्थित चल रहा है. उसने किसी अन्य कर्मी को अभिलेखों का प्रभार भी नहीं सौंपा है.
4.69 लाख के गबन का आरोप
जांच के दौरान पाया गया कि 15 नवंबर 2024 और 29 नवंबर 2024 को आयोजित नीलामियों के माध्यम से विभिन्न नीलामीकर्ताओं से कुल 4,69,268 रुपये नकद प्राप्त किए गए थे. यह पूरी राशि सरकारी कोष में जमा नहीं कराई गई, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा है.
पुलिस कर रही मामले की जांच
मद्य निषेध अधीक्षक के आवेदन पर नगर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. इस घटना के बाद से ही विभाग में हड़कंप मचा हुआ है. पुलिस अब पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि फर्जीवाड़े में शामिल सभी तत्वों का खुलासा किया जा सके.
