रुपये रहते भटकते रहे मरीज

नवादा नगर : पोते को पांच दिन से बुखार है, इसे दिखाने के लिए नवादा आये हैं, लेकिन यहां डॉक्टर के पास पांच सौ रुपये के नोट नहीं लिये जाने के कारण इसे डाॅक्टर से नहीं दिखा पायी हूं. ये बातें कौआकोल प्रखंड के चरौल गांव से आयी बुजुर्ग महिला सरस्वती देवी ने कहीं. कुछ […]

नवादा नगर : पोते को पांच दिन से बुखार है, इसे दिखाने के लिए नवादा आये हैं, लेकिन यहां डॉक्टर के पास पांच सौ रुपये के नोट नहीं लिये जाने के कारण इसे डाॅक्टर से नहीं दिखा पायी हूं. ये बातें कौआकोल प्रखंड के चरौल गांव से आयी बुजुर्ग महिला सरस्वती देवी ने कहीं.
कुछ इसी प्रकार की स्थिति रजौली के श्रवण पांडेय की थी, श्रवण खांसी की शिकायत को लेकर इलाज के लिए डॉ बीके शर्मा के यहां आया था, लेकिन पांच सौ का नोट रहने के कारण इसकी जांच नहीं हो पायी. एक हजार व पांच सौ के नोट बंद करने की घोषणा के बाद दवा दुकानदार व निजी क्लिनिकों में भी इसे लेने से इनकार किया जा रहा था.
पत्रकारों के जाने के बाद कुछ लोगों से पांच सौ रुपये के नोट लिये गये, लेकिन सामान्य रूप से इलाज के लिए भी लोग भटकते दिखे. यही हाल दवा दुकानों पर भी देखने को मिली. दवा लिये जाने के बदले में सौ व 50 के नोट मांगे जा रहे थे. दवा दुकानदारों ने कहा कि छोटे नोट है ही नहीं तो खरीदारी के बाद बाकी के रुपये लौटाये कैसे.
गांव से आये कई लोग रुपये होने के बाद भी इलाज के भटकते रहे. सरकार की घोषणा के बाद भी दवा व इलाज के लिए एक हजार व पांच सौ रुपये के नोट लगभग नहीं लिये जा रहे थे. दवा दुकानदार चुन्नू कुमार ने कहा कि दुकान में जितने भी खुदरा नोट था, वह समाप्त हो गया है. दवा खरीदने के जो आ रहा है व हजार व पांच के नोट ही दे रहा, तो वापस करने के लिए रुपये नहीं है, ऐसे में दवा कैसे दिया जा सकता है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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