श्रीगणेश गोशाला में एक बछड़ा तक नहीं

सात सात पहले दर्जनों पशुओं का रहता था झुंड वारिसलीगंज : नगर पंचायत के वार्ड सात में श्री गणेश गोशाला का अस्तित्व बचा पाना काफी मुश्किल हो रहा है. सात-आठ सात पहले यहां दर्जनों दुधारू गायें, चार-पांच सांढ़, बैल के साथ-साथ दर्जनों पशुओं का झुंड रहा करता था. फिलहाल एक बछड़ा भी नहीं दिखता है. […]

सात सात पहले दर्जनों पशुओं का रहता था झुंड
वारिसलीगंज : नगर पंचायत के वार्ड सात में श्री गणेश गोशाला का अस्तित्व बचा पाना काफी मुश्किल हो रहा है. सात-आठ सात पहले यहां दर्जनों दुधारू गायें, चार-पांच सांढ़, बैल के साथ-साथ दर्जनों पशुओं का झुंड रहा करता था. फिलहाल एक बछड़ा भी नहीं दिखता है.
गोशाला की खासियत : गोशाला में छत विहीन 12 कमरे, भोजन विहीन 32 नादें, पानी विहीन मोटर, जंग लगा चार मशीन, पशुओं के लिए हरा चारा के लिए अलग से जमीन, जो गोशाला के प्रांगण में स्थित है. गोशाला के प्रांगण में प्रतिवर्ष गोपाष्टमी के दिन प्रशासन की देखरेख में मेला लगाया जाता है. इसमें पशुओं का भोजन, रखरखाव व मेले का खर्च व्यापारियों द्वारा कमाई का सवा प्रतिशत अंश गोशाला में दिया जाता था. साथ ही दुधारू गायों की दूध का बिक्री, बड़े-बड़े साहुकार द्वारा गुप्त दान आदि गोशाला की आमदनी का जरिया था.
अब की स्थिति : अभी गोशाला की स्थिति यह है कि रखरखाव के अभाव में सारी व्यवस्था चौपट हो गयी है. दीवार में लगे ईंट एक-एक कर गिरते जा रहे हैं. छत का खपरैल छिन्न-भिन्न हो चुका है. व्यवस्थापक की लापरवाही से गोशाला अतिक्रमण की चपेट में आ गया है.
इतना ही नहीं दर्जनों पशुओं वाले इस गोशाला दर्शन करने को भी जानवर नहीं है. गायें व बछड़ों से भरा गोशाला में अब एक बछड़ा भी नहीं दिखता है. कुल मिला कर कहा जा सकता है कि संसाधन तो आज भी मौजूद है. इसका उपयोग नहीं कर दुरुपयोग किया जा रहा है. हालांकि गोशाला के आसपास रहनेवाले किरायेदार किराये के रुप में माहबारी गोशाला कमेटी को दिया करते हैं. इसके बावजूद गोशाला की हालत ही जर्जर ही नहीं बल्कि जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है. हालांकि गोशाला का अपना कमेटी है, जिसके पदेन अध्यक्ष सदर अनुमंडलाधिकारी होते हैं.

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