आस्था. कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र शुरू, प्रशासन रहा चुस्त-दुरुस्त
डीजे व पारंपरिक तरीके से निकली शोभायात्रा
प्रसिद्ध शोभनाथ व सूर्य मंदिर से श्रद्धालुओं ने की जलभरी
नवादा कार्यालय : सर्वमंगल मांगल्ये…विश्व की मंगलकामना के साथ असत्य पर सत्य,अन्याय पर न्याय व अत्याचार पर सदाचार के विजय का पर्व दशहरा का शुभारंभ शनिवार को हो गया.
जिले भर में श्रद्धा व उल्लास के साथ कलश स्थापना को लेकर भव्य शोभा यात्राएं निकाली गयीं. जय दुर्गे, शेरावाली माता के जयकारे से पूरा शहर गुंजयमान होता रहा. इसी के साथ नौ दिनों तक चलनेवाला शारदीय नवरात्र आरंभ हो गया. हालांकि द्वितीय तिथि में वृद्धि के कारण इस वर्ष विजयादशमी एक दिन की बढोत्तरी के साथ 11 अक्तूबर को मनायी जायेगी. शहर की लगभग तीन दर्जन पूजा समितियों द्वारा कलश में जल भराई कार्यक्रम आयोजित किया गया.
इसके लिए मुख्य शहर से खुरी नदी के सूर्य नारायण मंदिर घाट पर यजमानों ने जल भराई अनुष्ठान को संपन्न किया. जबकि खुरी नदी के दक्षिणी किनारे पर बसे क्षेत्र के नागरिकों ने शोभनाथ मंदिर से जल भराई कार्यक्रम किया गया. शहर के हजारों श्रद्धालुओं ने विभिन्न प्रसिद्ध मंदिर स्थित तालाब व कुएं से भी जल भराई की.
इस दौरान श्रद्धालुओं की भावनाएं अपने चरम पर थी. डीजे के साथ पारंपरिक ढोल नगाड़ों की धुन पर झूमती गाती टोलियों ने माता दुर्गा के आगमन पर अपनी भावनाओं का प्रदर्शन किया. सेठ सागरमल मंदिर सब्जी बाजार, अगिया बेताल, चक्रवर्ती सम्राट, स्टेशन रोड, पुरानी कचहरी रोड, काली माता पूजा समिति, राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी मंदिर, पुरानी बाजार, सुर असुर पूजा समिति, भगत सिंह पूजा समिति सहित दर्जनों पूजा समितियों ने जयकारे व शंखनाद के साथ यात्राएं निकालीं.
गूंजते रहे मां दुर्गा के जयघोष : पार नवादा क्षेत्र के पूजा पंडालों के साथ ही कलश स्थापना कर दुर्गा पाठ करनेवाले भक्तों की भीड़ शोभ मंदिर की ओर जाती दिखी. नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना हेतु जल भरने के लिए गाजे-बाजे व डीजे के धुन पर नाचते-गाते युवाओं की टोली सड़कों पर धूमधाम से निकली हुई थी. जय दुर्गे के जयकारा लगाते हुए पार नवादा देवी स्थान,
बिजली ऑफिस के सामने भदौनी, बुंदेलखंड, पावर ग्रिड आदि पूजा समितियों के साथ ही हजारों की संख्या में महिला पुरुष श्रद्धालुओं ने शोभ मंदिर में जल भरी की. शोभिया स्थित विंध्यवासिनी मंदिर में मुख्य पुजारी राजेश पांडेय ने यजमान दीपक कुमार द्वारा कलश स्थापित कर माता की पूजा-अर्चना शुरू की.
